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लिपस्टिक, अंडरवियर और सैलून जैसी 54 वस्तुओं की बिक्री से भी मिलता है मंदी का संकेत

Sat, 14 Sep 2019 10:22 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : Twitter
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किसी भी देश में मंदी आई है या फिर नहीं, इसका पता करने के कुछ बड़े कारण तो हैं। लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसे छोटे कारण भी इसमें शामिल हैं, जिनसे आपको पता लग सकेगा कि क्या सही में ऐसा हो रहा है। अर्थशास्त्रियों की मानें तो कई ऐसी वस्तुएं हैं, जिनकी बिक्री में बढ़ोतरी या फिर कटौती होने से आपको आसानी से पता चल जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति कहां पर है।

इनसे पता चलती है अर्थव्यवस्था की कहानी

अगर हम कहें कि बिक्री बढ़ना मंदी की निशानी है, तो आप कहेंगे ये गलत है। लेकिन अर्थव्यवस्था में कुछ ऐसी वस्तुएं हैं, जिनकी बिक्री बढ़ने से पता चलता है कि मंदी आ गई है। वहीं कुछ ऐसी भी वस्तुएं हैं जिनकी बिक्री में गिरावट मंदी का संकेत देती है। हालांकि रियल इस्टेट, ऑटो सेक्टर और बिस्किट, तेल आदि की घटती बिक्री के अलावा भी 54 ऐसे संकेत हैं, जो मंदी की ओर इशारा करते हैं। इनमें से कुछ वस्तुओं के बारे में हम आपको आज बता रहे हैं। 

लिपस्टिक की बढ़ती बिक्री है मंदी का संकेत

महिलाएं अगर लिपस्टिक ज्यादा खरीदने लगें तो फिर यह बताता है कि देश में मंदी आ गई है। लिपस्टिक इंडिकेटर वाली थ्योरी कहती है कि जब महिलाएं आर्थिक हालात को लेकर आश्वस्त नहीं होतीं तो उनका ध्यान कपड़ों और एक्सेसरीज से कम महंगी चीजों पर शिफ्ट हो जाता है। एसटी लॉडर के चेयरमैन ने अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमलों के बाद के कुछ महीनों में देखा कि कंपनी की लिपस्टिक की बिक्री दोगुनी हो गई थी। बाद में हुई रिसर्च से पता चलता कि अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ने पर लिपस्टिक की बिक्री बढ़ जाती है।

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लिपस्टिक इंडेक्स का प्रयोग सबसे पहले 'एस्टी लॉडर' के पूर्व चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने वर्ष 2000 की आर्थिक मंदी के दौरान कंपनी की कॉस्मेटिक बिक्री में हुई बढ़ोतरी को समझाने के लिए किया था। कई सारे कलर कॉस्मेटिक ब्रांड्स ने 2001 और 2008 की मंदी में समान ट्रेंड दिखाए थे।

भारत में बढ़ी बिक्री

भारत में, उपभोक्ता इस समय गाड़ी या टिकाऊ उपभोग की वस्तुओं की खरीद को टाल रहे हैं, लेकिन लिपस्टिक जैसी छोटी विलासिता के सामान खरीद रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि मंदी के दौरान महिलाएं कपड़ों और अन्य महंगे फैशन की बजाय लिपस्टिक पर अधिक खर्च करती हैं।

डेटिंग होने लगे ज्यादा तो मंदी का संकेत

मंदी के दौर में अक्सर लोग खाली होते हैं। ऐसे समय में जब कंपनियां मुश्किल दौर में होती हैं तो फिर डेटिंग करने के लिए लोगों को ज्यादा समय मिल जाता है। आम लोग अपने दुखों को किनारे रखने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. इससे पहले साल 2008 की चौथी तिमाही में डेटिंग साइट की व्यस्तता सात साल में सर्वाधिक थी। अब डेटिंग एप को लोग ज्यादा संख्या में डाउनलोड कर रहे हैं। इन एप्स पर सर्च की संख्या भी करने लगे हैं। 

सैलून से भी मिलते हैं संकेत 

अगर यह कहा जाए कि नाई भी देश की आर्थिक स्थिति की जानकारी दे सकता है तो क्या आप विश्वास करेंगे/ सेल्फमेड बिलियनेयर जॉन पॉल देओरिया (2019 में 2.60 अरब डॉलर नेटवर्थ) की मानें तो आपको इसे कभी नजरंदाज नहीं करना चाहिए। उनके हिसाब से जब अर्थव्यवस्था की गाड़ी पटरी पर होती है तो लोग हर सवा महीने पर एक बार बाल कटाने सैलून जरूर जाते हैं। अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने पर गैप बढ़कर दो महीने हो जाता है।

डायपर की घटती बिक्री

अगर माता-पिता बच्चों के डायपर खरीदना कम कर दें तो फिर यह भी मंदी की ओर इशारा करता है। माता-पिता खर्चों को कम करने के लिए डायपर का प्रयोग न के बराबर कर देते हैं। ऐसे में इसे भी माना जाता है कि अब मंदी आ गई है। 

अंडरगार्मेंट्स की घटती बिक्री

अंडरगार्मेंट्स की घटती बिक्री इस बात का संकेत हो सकता है कि भारतीय उपभोक्ता ऐसी वस्तुओं पर भी खर्च करने से बच रहे हैं।  बता दें कि 49 साल पहले साल 1970 के दशक में इस अंडरगार्मेंट्स इंडेक्स को एलन ग्रीनस्पैन ने ईजाद किया था। 

इंडेक्स के मुताबिक, पुरुषों के अंडरगारमेंट्स की बिक्री में आने वाली गिरावट देश की खराब अर्थव्यवस्था का संकेत देता है, जबकि इनकी बिक्री बढ़ने पर अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ते हुए आगे बढ़ती है। जॉकी के अंडरगारमेंट्स बेचने वाली कंपनी पेज इंडस्ट्रीज की बिक्री महज दो फीसदी ही बढ़ी है। साल 2008 के बाद से यह कंपनी का सबसे धीमी गति से हुआ विस्तार है। वहीं डॉलर इंडस्ट्रीज और वीआईपी में क्रमशः चार फीसदी और 20 फीसदी की गिरावट दिखी। इतना ही नहीं, लक्स इंडस्ट्रीज की सेल्स में भी कमी दर्ज की गई।

कैंची की बिक्री सुस्त

मंदी की जंग से 350 साल पुरानी मेरठ की कैंची इंडस्ट्री की धार कुंद पड़ने लगी है। सैलून, घरेलू प्रयोग व टेक्सटाइल्स कारोबार में बड़ी मात्रा में कैंची की खपत है। वस्त्र उद्योग में देशी कैंची की खपत 60 फीसद तक घट गई। हालांकि चीनी कैंची की बिक्री में इजाफा देखने को मिला है।

बंजर भूमि को कब्रिस्तान के लिए बेचना

अगर बहुत सारे लोगों के पास बंजर भूमि पड़ी है और वो इसे कब्रिस्तान या फिर अन्य किसी काम के लिए बेचने लगें तो फिर इसे मंदी के तौर पर देखा जाता है। इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति अपने किसी रिश्तेदार की मौत पर उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर देते हैं तो यह मंदी का संकेत है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग मंदी के समय अंतिम संस्कार में होने वाले बड़े खर्च को भी करने से बचते हैं। 

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