Ed Action: एजेंसी ने कहा कि इससे पहले पूछताछ के दौरान संतोष ईपेन ने खुलासा किया था कि त्रिशूर के वडाकनचेरी में लाइफ मिशन हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए यूएई रेड क्रीसेंट से प्राप्त 7.75 करोड़ रुपये में से 3.80 करोड़ रुपये विभिन्न अधिकारियों को कमीशन के रूप में वितरित किए गए थे।
कोच्चि में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने मंगलवार को यूनिटैक बिल्डर्स के प्रबंध निदेशक संतोष ईपेन को कथित लाइफ मिशन घोटाला मामले में 23 मार्च तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। इससे पहले सोमवार को संतोष को ईडी ने कैस के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। संतोष को ईडी ने सोमवार को गिरफ्तार किया था।
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एजेंसी ने कहा कि इससे पहले पूछताछ के दौरान संतोष ईपेन ने खुलासा किया था कि त्रिशूर के वडाकनचेरी में लाइफ मिशन हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए यूएई रेड क्रीसेंट से प्राप्त 7.75 करोड़ रुपये में से 3.80 करोड़ रुपये विभिन्न अधिकारियों को कमीशन के रूप में वितरित किए गए थे। जांच टीम को दिए अपने बयान में उसने खुलासा किया कि कुछ बैंक अधिकारियों की मदद से उसने भारतीय रुपये का डॉलर के रूप में आदान-प्रदान किया था। इसे सीधे तिरुवनंतपुरम यूएई वाणिज्य दूतावास में एक पूर्व एकाउंटेंट खालिद शोकरी को सौंप दिया था।
एजेंसी ने दावा किया कि उसने ईडी अधिकारियों को यह भी बताया कि उसने सोना तस्करी मामले की आरोपी स्वप्ना सुरेश, पीएस सरित और संदीप नायर के निर्देशानुसार वाणिज्य दूतावास के अधिकारी को पैसे दिए थे। इससे पहले मंगलवार को एक विशेष पीएमएलए अदालत ने इसी मामले में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर की न्यायिक हिरासत 4 अप्रैल तक बढ़ा दी थी। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने 14 फरवरी को गिरफ्तार किया था।
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यह मामला राज्य सरकार की लाइफ मिशन परियोजना से संबंधित है जिसका उद्देश्य 2018 की बाढ़ में अपने घरों को खोने वाले गरीबों को घर प्रदान करना था। यह आवासीय परियोजना त्रिशूर जिले के वड्डाकनचेरी में प्रस्तावित थी। इस परियोजना का उद्देश्य रेड क्रिसेंट की ओर से संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास के माध्यम से दिए गए 18.50 करोड़ रुपये में से 14.50 करोड़ रुपये खर्च करके वडक्कनचेरी में 140 परिवारों के लिए घर बनाना था।
#पश्विम बंगाल में जबरन धर्मांतरण के आरोपों से जुड़े मामले में सीबीआई ने शुरू की जांच
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में पिछले साल कथित जबरन धर्मांतरण के एक मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर प्रारंभिक जांच शुरू की है। बुधवार को अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी है। एजेंसी ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल का समर्थन करने पर दो भाइयों का जबरन धर्मांतरण कराने के मामले की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज कराने से पूर्व प्रारंभिक जांच शुरू की है।