भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 13,492 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में एलआईसी का मुनाफा 10,987 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय और प्रीमियम कलेक्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उसके कारोबार में मजबूती देखने को मिली है।
एलआईसी की नियामकीय सूचना के अनुसार, जून तिमाही में कंपनी की कुल आय बढ़कर 2,37,848 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 2,22,864 करोड़ रुपये थी। पहली बार मिलने वाले प्रीमियम से आय बढ़कर 9,217 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 7,525 करोड़ रुपये थी। वहीं रिन्यूअल प्रीमियम से आय 59,885 करोड़ रुपये से बढ़कर 61,833 करोड़ रुपये हो गई।
प्रीमियम कलेक्शन में कितनी बढ़ोतरी हुई?
एलआईसी ने बताया कि एकमुश्त (सिंगल) प्रीमियम से उसकी आय भी बढ़ी है। जून तिमाही में कंपनी ने 56,369 करोड़ रुपये का सिंगल प्रीमियम जुटाया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 51,923 करोड़ रुपये था। इसके चलते कंपनी की कुल शुद्ध प्रीमियम आय बढ़कर 1,27,250 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 1,19,200 करोड़ रुपये थी। इससे साफ है कि कंपनी के बीमा कारोबार में लगातार वृद्धि बनी हुई है।
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खर्च और वित्तीय मजबूती पर क्या तस्वीर रही?
तिमाही के दौरान एलआईसी का कुल खर्च भी बढ़ा। कंपनी का कुल खर्च 2,11,928 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,25,573 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि इसके बावजूद कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रही। एलआईसी का सॉल्वेंसी अनुपात बढ़कर 2.42 गुना हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 2.17 गुना था। सॉल्वेंसी अनुपात किसी बीमा कंपनी की दावों का भुगतान करने की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
निवेशकों और पॉलिसीधारकों के लिए क्या संकेत?
पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि एलआईसी की आय और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी हुई है। प्रीमियम संग्रह में लगातार वृद्धि और बेहतर सॉल्वेंसी अनुपात कंपनी की वित्तीय मजबूती को दर्शाते हैं। हालांकि खर्च में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मुनाफे और आय में सुधार से संकेत मिलता है कि कंपनी अपने बीमा कारोबार का विस्तार जारी रखे हुए है। इससे निवेशकों के साथ-साथ पॉलिसीधारकों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है।