देश के सबसे बड़े आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। दरअसल, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार एलआईसी आईपीओ का आकार छोटा कर सकती है। इसे 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इसके लिए डेढ़ महीने से ज्यादा समय से जारी रूस और यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार ठहराया गया है।
इन कारणों से कर सकती है निर्णय
इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण निवेशकों की धारणाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर कारोबारी माहौल सुस्त और बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारतीय बाजारों में भी विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इन सबके चलते सरकार एलआईसी आईपीओ का आकार घटाने पर विचार कर रही है। फिलहाल तक इस आईपीओ के जरिए सरकार 63,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही थी।
जल्द हो सकता है लॉन्चिंग पर फैसला
यहां बता दें कि सरकार एलआईसी आईपीओ को लॉन्च करने की तारीख का एलान जल्द कर सकती है। इसके अगले दो हफ्तों में लिस्टिंग की संभावना जताई जा रही है। एक रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर है और उनके भारत वापस आने के बाद इस बात का एलान किया जा सकता है कि देश का सबसे बड़ा आईपीओ कब पेश किया जाएगा।
31.6 करोड़ शेयर करने थी है योजना
बता दें कि एलआईसी का ये आईपीओ अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सेबी में पूर्व जमा कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, एलआईसी का इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें सरकार अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी के अंतर्गत 31.6 करोड़ शेयर जारी करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिसाब से कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये होगी। अमूमन किसी बीमा कंपनी का मार्केट कैप इस वैल्यू का चार गुना होता है। इस हिसाब से देखें तो एलआईसी की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपये होगी और एलआईसी देश की सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन जाएगी।
सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी
आपको बता दें कि भले ही सरकार कंपनी की वैल्यूएशन घटा दे, उसके बाद भी यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसके अलावा एलआईसी आईपीओ इश्यू साइज का 10 फीसदी तक पॉलिसीधारकों के लिए और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए आरक्षित हो सकता है। एलआईसी में सरकार के पास 100 फीसदी हिस्सेदारी यानी 632.49 करोड़ शेयर हैं। कंपनी के शेयरों की फेस वैल्यू 10 रुपये है।