फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नशा छोड़ो, रोजगार की तरफ बढ़ो, हरि चंदना का संकल्प

Thu, 11 Sep 2025 01:34 PM IST
Anil Vaishya नई दिल्ली
विज्ञापन
हरि चंदना - फोटो : Hari Chandana
विज्ञापन

जब जुबान से निकली बातें हकीकत में बदलती हैं, तभी असली बदलाव आता है। लंबे समय से भारत में नशीली दवाओं के खिलाफ जंग केवल नारों, अभियानों और औपचारिक बैठकों तक सिमटी रही। लेकिन जून 2025 में जिला कलेक्टर का पद संभालने वाली आईएएस अधिकारी हरि चंदना ने दिखा दिया कि बदलाव केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निर्णायक कदमों से आता है।

दोहरी रणनीति: शिक्षा और कड़ी कार्रवाई

हरि चंदना की रणनीति अनूठी है। एक ओर वे शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा क्लब बनाकर युवाओं में जागरूकता फैला रही हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े ड्रग पेडलरों पर शिकंजा कस रही हैं।

दंड से मुक्ति के चक्र को तोड़ना

PD एक्ट अधिकारियों को ऐसे आदतन अपराधियों को एक साल तक बिना जमानत के हिरासत में रखने का अधिकार देता है। यह कदम न केवल व्यक्तिगत अपराधियों पर असर डालता है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को तोड़ देता है। आपूर्ति श्रृंखलाएं टूटती हैं, आर्थिक जड़ें कमजोर होती हैं और संभावित अपराधियों के मन में डर पैदा होता है कि अब जोखिम उठाना इतना आसान नहीं रहेगा।

शिक्षा और सुरक्षा का संतुलन

हरि चंदना का मॉडल सि कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए शिक्षा को केंद्र में रखा है। स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षा क्लब, जागरूकता अभियान और रोजगार-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम यह संदेश देते हैं कि  "नशा छोड़ो, रोजगार की तरफ बढ़ो।" जब छात्र देखते हैं कि समाज ड्रग माफिया को सड़कों से हटा रहा है, तो "ड्रग्स को ना कहें" का संदेश उनके लिए और भी प्रभावी बन जाता है।

राष्ट्रीय स्तर का आदर्श

हरि चंदना का तरीका केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह एक राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। भारत के कई राज्यों में PD एक्ट मौजूद है, परंतु उसका उपयोग कम होता है। अधिकांश अधिकारी साधारण गिरफ्तारियों से संतुष्ट रहते हैं, जिससे अपराधी जमानत पाकर दोबारा वही अपराध करने लगते हैं। हरि चंदना ने इस यथास्थिति को चुनौती दी है और दिखाया है कि प्रशासनिक साहस के बिना नशा मुक्त समाज की कल्पना अधूरी है।

निर्णायक बदलाव की राह

तेलंगाना सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और EAGLE एजेंसी जैसे विशेष तंत्र के साथ मिलकर, हरि चंदना यह साबित कर रही हैं कि नशा विरोधी जंग केवल पोस्टर-बैनर तक सीमित नहीं है। यह जमीनी कार्रवाई और ठोस प्रशासनिक फैसलों से ही संभव है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें