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AU Exclusive: रोजगार के सही आंकड़ों से बेहतर बनेगा श्रम क्षेत्रः अमिताभ कांत

Mon, 06 Aug 2018 11:04 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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नीति आयोग देश को विकास का रास्ता दिखाने के लिए ऊर्जा क्षेत्र, रियल एस्टेट क्षेत्र, ई-कॉमर्स नीति सहित तमाम योजनाओं पर काम कर रहा है। यह शहर से लेकर गांव तक बहुमुखी विकास और कायाकल्प के लिए न्यू इंडिया की रणनीति तैयार करने के करीब है। विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों सहित अन्य मुद्दों पर पीयूष पांडेय ने आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत से विस्तृत बातचीत। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश : 
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प्रश्न - रोजगार से जुड़े वास्तविक आंकड़े जुटाने की दिशा में नीति आयोग कहां तक पहुंचा है? रोजगार घटने के आरोपों पर आपकी क्या राय है?
उत्तर - सरकार ने पिछले चार वर्षों में व्यापक आर्थिक सुधार किए हैं। ये सुधार मूलत: रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हैं, जिनसे रोजगार में बढ़ोतरी भी हुई है। सुरजित एस. भल्ला की अध्ययन रिपोर्ट पर गौर करें, तो यह स्पष्ट हो जाएगा। रहा सवाल सही आंकड़ों का तो विकासशील देशों में असंगठित क्षेत्र बेहद व्यापक है, जिसमें रोजगार के आंकड़े उच्च आवृत्ति के साथ शायद ही उपलब्ध होते हैं। केंद्र सरकार ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष के नेतृत्व में रोजगार आंकड़ों में सुधार के लिए एक टास्क फोर्स नियुक्त किया, जिसने अगस्त 2017 में अपनी सिफारिशें पेश कीं। टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद आयोग और संबंधित मंत्रालय इस पर लगातार काम कर रहे हैं। दो सर्वेक्षण भी किए गए हैं। उम्मीद है कि अगले छह माह में इन दोनों सर्वेक्षणों के कुछ परिणाम उपलब्ध होंगे।
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प्रश्न - नीति आयोग ने आंकड़े जुटाने को लेकर टास्क फोर्स के अलावा क्या कदम उठाया है?
उत्तर - आयोग ने टास्क फोर्स के अलावा, औपचारिक रोजगार क्षेत्र में प्रशासनिक रिकॉर्ड से आंकड़े जुटाने की पहल शुरू की है। नए और निरंतर रोजगार के विश्लेषण के लिए देश में पहली बार औपचारिक क्षेत्र के लिए पेरोल रिपोर्टिंग शुरू की गई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) का आंकड़ा उनकी वेबसाइटों पर सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है। सांख्यिकी मंत्रालय इन तीनों स्रोतों से आंकड़े लेकर एक समेकित रिपोर्ट तैयार कर रहा है। यह रिपोर्ट उन नए लोगों की संख्या बताती है, जिन्होंने तीन प्रमुख योजनाओं अर्थात् कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा योजना और राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत लाभ उठाया है।

प्रश्न - नीति आयोग ने क्या कोई कार्य योजना तैयार की है? राज्य सरकारों ने आयोग के समक्ष इस पर कोई प्रतिक्रिया जताई है?
उत्तर - नीति आयोग ‘न्यू इंडिया की रणनीति@75’ के लिए एक मसौदा तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन सहित 2022-23 तक महत्वपूर्ण क्षेत्रों की विस्तृत श्रृंखला में परिवर्तन लाने के लिए स्पष्ट उद्देश्यों को परिभाषित करना है, जिसमें इन क्षेत्रों में पहले उठाए गए कदमों और चुनौतियों को ध्यान में रखना तथा बाध्यकारी बाधाओं की पहचान करना शामिल है। साथ ही, निर्धारित 2022-23 तक आगे बढ़ने और उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सुझाव देना भी है। ‘न्यू इंडिया की रणनीति@75’ के मसौदा दस्तावेज को आयोग अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। मौजूदा समय में व्यापक स्तर पर टिप्पणियों और सुझावों के लिए हितधारकों के साथ परामर्श प्रक्रिया चल रही है। 
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प्रश्न - नीति आयोग के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक ही मंत्रालय स्थापित करने के सुझाव पर आपकी क्या राय है? इससे सरकार और आम जनता को किस तरह का फायदा होगा?
उत्तर - ऊर्जा नीति के मसौदे में ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों के मामले में खंडित के बजाय व्यापक दृष्टिकोण का उल्लेख है। यह ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के बीच समन्वय का एक साधारण मुद्दा नहीं, बल्कि उसके सभी पहलुओं पर एक व्यापक दृष्टिकोण है। ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों के उपयोग पर एक एकीकृत नियामक ढांचा बिना किसी भेदभाव के ऊर्जा के सभी स्रोतों को सही स्तर हासिल कराएगा। यह दृष्टिकोण ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों के उपयोग के लिहाज से पर्यावरण, उपलब्धता और लागत को मुनासिब रखेगा। अक्सर ऊर्जा के स्रोतों पर एक सर्वोत्कृष्ट दृष्टिकोण के बजाय मंत्रालयों द्वारा अपने क्षेत्राधिकार में एक विभागीय दृष्टिकोण लिया जाता है, जो दरअसल विभिन्न प्रकार के उपयोगों के मद्देनजर होना चाहिए।  
संसाधनों के कुशल उपयोग से सरकार और जनता एकीकृत दृष्टिकोण से लाभान्वित होंगे और ऊर्जा के स्रोत कम कीमत पर विभिन्न उपयोगों के लिए मुहैया होंगे।

प्रश्न - रियल एस्टेट क्षेत्र को उबारने के लिए थिंक टैंक नीति योजना तैयार कर रहा है। इस संबंध में सरकार को कब तक सिफारिशें सौंपी जाएंगी? इस क्षेत्र को आयोग कैसे उबारेगा?
उत्तर - सरकार ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (आरईआरए) के जरिये इस क्षेत्र की संरचना बेहतर करने का प्रयास किया है। इसके व्यापक विनियामक प्रावधानों के जरिये खरीदारों के साथ ही बिल्डरों के हितों की भी रक्षा भी हो रही है। इसके परिणाम काफी उत्साहजनक हैं। आवास परियोजनाओं के मुताबिक, मंजूरी के लिए सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम पहले से ही 370 एएमआरयूटी (अमृत) शहरों में लागू किया जा चुका है और शेष 130 शहरों में इसे मार्च 2019 तक लागू करने की संभावना है। इस तरह के हस्तक्षेप को रियल एस्टेट क्षेत्र में गेम चेंजर्स के रूप में देखा जाता है। नीति आयोग ने क्रेडाई और नारडेको के साथ परामर्श किया है, ताकि वे सकारात्मक मूल्यवान परियोजनाओं की पहचान करने के साथ ही घर खरीदारों और ब्याज परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बिल्डरों के हित में इसे आगे बढ़ाने पर विचार कर सकें। हम इस पर वित्त मंत्रालय और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

प्रश्न - कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई बढ़ी है। क्या आयोग ने महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार को कोई सुझाव दिया है?
उत्तर - यह बिल्कुल सही है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, जिस पर नियंत्रण देश की सरकार के हाथ में नहीं है। हालांकि, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है और महंगाई नहीं बढ़ रही है। नीति आयोग ने महंगाई को काबू में रखने के लिए मौद्रिक नीति पर रिजर्व बैंक को कोई सुझाव नहीं दिया है। सरकार संतुलन कायम करते हुए देश के सतत विकास में आगे बढ़ रही है। 

प्रश्न - नीति आयोग ने सार्वजनिक निकायों के विनिवेश के संबंध में कई सिफारिशें की हैं। किस तरह के पीएसयू सरकार के अधीन होने चाहिए? 
उत्तर - सरकार का काम कारोबार करना नहीं है। सार्वजनिक उद्यम (सीपीएसई) वहीं होने चाहिए, जहां सार्वजनिक उद्देश्यों की पूर्ति करनी है या फिर जहां बाजार पूरी तरह से विफल हो रहा हो। रणनीतिक विनिवेश के लिए अन्य सभी सीपीएसई पर विचार किया जा सकता है। इससे दक्षता का बड़ा लाभ मिलेगा और सभी हितधारकों और अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। यही वह दर्शन है, जिसके आधार पर नीति आयोग ने विनिवेश आयोग की भूमिका अपनाई है।
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