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अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अच्छा नहीं है थोक कीमतों का गिरना?

Tue, 16 Jun 2020 12:07 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुद्रास्फीति - फोटो : pixabay
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भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में मई माह के दौरान ईंधन और बिजली के दाम घटने से 3.21 फीसदी की गिरावट रही, जो पिछले चार साल सें सबसे अधिक है।

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मई माह के दौरान खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 1.13 फीसदी रही। इससे एक महीना पहले अप्रैल में यह 2.55 फीसदी थी। वहीं ईंधन और बिजली समूह में मई के दौरान 19.83 फीसदी महंगाई रही जबकि एक महीना पहले अप्रैल में भी इसमें 10.12 फीसदी की गिरावट रही थी। वहीं, विनिर्मित उत्पादों के मामले में भी मई माह के दौरान 0.42 फीसदी की गिरावट रही।

थोक मूल्यों के डाटा को प्रकाशित करने वाले वाणिज्य मंत्रालय ने देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अप्रैल में डब्ल्यूपीआई का पूरा डाटा जारी नहीं किया था। सांख्यिकी मंत्रालय, जो उपभोक्ता मूल्य डाटा प्रकाशित करता है, उसने लॉकडाउन का हवाला देते हुए पिछले दो महीनों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति की आंकड़े रोक दिए हैं।
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बुरी खबर:
खुदरा मुद्रास्फीति आपके खर्च, उधार और निवेश (ब्याज दर में बदलाव से प्रभावित) के बारे में होती है। जबकि थोक मुद्रास्फीति कारखाने में उत्पादों की कीमतों का आंकड़ा होता है, जो आपके वेतन वृद्धि और नौकरी के अवसरों का एक अप्रत्यक्ष संकेतक देता है। थोक मूल्य सूचकांक के कम होने का मतलब है कि निर्माता (जो बड़े नियोक्ता हैं), वे उत्पादों की कीमतों को बढ़ाने में असमर्थ हैं, जो उद्योगों के लिए प्रमुख होता है।

जोखिम:
देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वित्त वर्ष 2020- 21 के दौरान पांच फीसदी की गिरावट आने से भारतीय उद्योग जगत के राजस्व में 15 फीसदी तक की कमी आ सकती है और यह स्थिति देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए 'अस्तित्व का संकट' खड़ा कर सकती है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की शोध शाखा की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसएमई क्षेत्र को इस स्थिति में राजस्व में 21 फीसदी तक की तेज गिरावट का सामाना करना पड़ सकता है। जबकि ऐसे में उसका परिचालन मुनाफा कम होकर मार्जिन चार से पांच फीसदी रह जाएगा।

आगे क्या? 
डब्ल्यूपीआई में गिरावट उम्मीद से अधिक हुई। अर्थशास्त्रियों के ब्लूमबर्ग पोल ने मई में WPI के 1.2 फीसदी गिरने का अनुमान लगाया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में और कटौती हो सकती है। केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने नीतिगत दरों में 0.40 फीसदी की कटौती की थी, जिससे प्रमुख रेपो दर सबसे कम यानी चार फीसदी हो गई।

निर्यात में लगातार तीसरे महीने गिरावट
साथ ही देश के निर्यात में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई है। मई महीने में यह 36.47 फीसदी घटकर 19.05 अरब डॉलर रहा। मुख्य रूप से पेट्रोलियम, कपड़ा, इंजीनियरिंग, रत्न एवं आभूषण के निर्यात में कमी के कारण कुल निर्यात घटा है।
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार आयात भी पिछले महीने 51 फीसदी घटकर 22.2 अरब डॉलर रहा। इससे व्यापार घाटा घटकर 3.15 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले साल इसी महीने में 15.36 अरब डॉलर था। चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में निर्यात 47.54 फीसदी घटकर 29.41 अरब डॉलर रहा। 

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