करदाताओं की सहूलियत के लिए आयकर कानून में कई तरह के फॉर्मों का जिक्र है, जिनका उपयोग अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता है। इन्हीं में से एक, फॉर्म-16 कर्मचारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फॉर्म-16 को नौकरी देने वाला संस्थान जारी करती है। इसके जरिए करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने में मदद मिलती है और साथ ही इनकम के सबूत के तौर पर भी इसका इस्तेमाल होता है। करदाताओं को फॉर्म-16 के पार्ट बी की स्क्रूटनी करनी चाहिए। करदाताओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसमें दर्ज सभी कटौतियां और वेतन संबंधित विवरण सही है या नहीं।
उदाहरण से समझते हैं कि टैक्स की बचत करते हुए रिटर्न कैसे भर सकते हैं।
मान लीजिए कि किसी करदाता का सालाना वेतन 16.5 लाख रुपये है और सेविंग खातों से उसे 8000 रुपये, जो कर योग्य है। ऐसे में कर योग्य आय 16.8 लाख रुपये होती है। निवेश के जरिए मिलने वाली छूट में जीवन बीमा प्रीमियम, होम लोन के मूलधन और बच्चों की ट्यूशन फीस शामिल है, जिससे उन्हें 1.50 लाख रुपये की छूट मिल जाएगी। इसके साथ ही धारा 80 सीसीडी के तहत एनपीएस में उन्हें 50,000 रुपये के निवेश पर छूट मिलेगी।
यदि करदाता पर 40 लाख रुपये का होम लोन है और सालाना 70,000 रुपये मूलधन पर 2.5 लाख ब्याज चुकाते हैं, तो इस पर दो लाख रुपये तक की छूट मिलेगी। स्वास्थय बीमा पर करदाता को धारा 80डी के तहत 50,000 रपये की छूट मिलती है। सेविंग खातों से मिले 8000 रुपये पर धारा 80 टीटीए में भी कटौती मिलेगी।
अगर 2.60 लाख टीडीएस पहले से जमा है, तो फिर 96,200 रुपये का रिफंड मिलेगा। इस तरह 11.50 लाख की आय पर करदाता पर 1,63,800 रुपये का टक्स लगेगा।