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कोरोना वायरसः क्या इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है?

Wed, 29 Jan 2020 01:58 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चीन एक नए वायरस के साथ संघर्ष कर रहा है जिसने 132 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। चीन के लिए ये एक गंभीर मुद्दा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चीन के लिए एक आपातकालीन स्थिति कहा है। हालांकि अभी बाकी दुनिया के लिए ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि आखिरकार इसके गंभीर आर्थिक नतीजे होंगे। लेकिन सवाल ये उठता है कि ये आर्थिक परिणाम कितने गंभीर होंगे और उनका असर कहां तक होगा?

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चूंकि कोरोना वायरस का प्रसार अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए अर्थशास्त्री फिलहाल कोई आंकड़े देने से एहतियात बरत रहे हैं।

चीन का पर्यटन व्यवसाय

अतीत में इस तरह की घटनाओं से हुए आर्थिक नुकसान को देखते हुए हम अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस के किसी संभावित असर के बारे में बता सकते हैं। ज्यादा पुरानी बात नहीं है, साल 2002-03 के दौरान सार्स की महामारी फैली थी और इसकी शुरुआत भी चीन में हुई थी। फिलहाल तो चीन को थोड़ा आर्थिक नुकसान हुआ ही है। देश के कुछ हिस्सों में यात्रा प्रतिबंध लागू हैं और वो भी ऐसे वक्त में जब चीनी नव वर्ष का समय है और लोग बड़ी संख्या में यात्राएं करते हैं। इस लिहाज से चीन के पर्यटन व्यवसाय को झटका लग ही चुका है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर

कोरोना वायरस से मनोरंजन और तोहफों पर उपभोक्ताओं के खर्च पर असर होगा। मनोरंजन क्षेत्र की बात करें तो बहुत से लोग घर से बाहर जाकर ऐसी किसी गतिविधि में हिस्सा लेने से बचेंगे जिनसे उनके संक्रमण की जद में आने का खतरा हो। इसमें कोई शक नहीं कि कई लोगों ने पहले से निर्धारित अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए होंगे।

हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कोरोना वायरस का प्रसार जिस वुहान शहर से शुरू हुआ वो चीन का एक अहम ट्रांसपोर्ट हब है। किसी भी ऐसे कारोबार के लिए जहां लोगों और वस्तुओं के आवागमन की जरूरत पड़ती हो, यात्रा प्रतिबंध एक बड़ी समस्या होती है। इससे इंडस्ट्री के सप्लाई चेन पर पर असर पड़ता है, कुछ चीजों की डिलेवरी में बाधा आती है और कुछ चीजें ज्यादा महंगी हो जाती हैं। अगर लोग काम के लिए सफर न कर सकें या न करना चाहें तो इससे कारोबार का नुकसान अलग से होता है।

इंश्योरेंस सेक्टर

कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के इलाज में होने वाला खर्च का भार सरकारी और निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को वहन करना पड़ेगा। चीन के बाहर काफी कुछ इस पर निर्भर करेगा कि कोरोना वायरस का असर कितना होता है। अगर ये महामारी कहीं और फैलती है तो इसका थोड़ा असर होना तय है हालांकि ये उतने बड़े पैमाने पर नहीं होगा। अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का प्रभाव काफी कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि ये वायरस कितनी आसानी से फैल सकता है और इससे संक्रमित होने वाले लोगों की मौत की आशंका किस हद तक है। अच्छी बात ये है कि इससे संक्रमित होने वाले काफी लोगों में पूरा सुधार देखा गया है, हालांकि इसके दुखद अपवाद भी रहे हैं। अक्सर ये देखा गया है कि आर्थिक समस्याओं को लेकर प्रतिक्रिया देने में वित्तीय बाजार ज्यादा देरी नहीं करते। क्योंकि यहां बिजनेस करने वाले ट्रेडर्स भविष्य के घटनाक्रम को भांपकर ही चीजों पर दांव लगाते हैं।

वैक्सीन का विकल्प

कोरोना वायरस का कुछ हद तक नकारात्मक असर दुनिया के शेयर बाजारों पर खासकर चीन में देखने को मिला है। लेकिन फिलहाल अभी हालात चिंताजनक नहीं हैं। यहां तक कि शंघाई कॉम्पोजोट इंडेक्स भी अपने पिछले छह महीने के रिकॉर्ड से उच्च स्तर पर है। परेशान करने वाली इन बातों को छोड़ भी दें तो अर्थव्यवस्था का एक क्षेत्र ऐसा है जिसके लिए ये एक अवसर की घड़ी है और उसे इसका फायदा हो सकता है। 

वो है दवा उद्योग। कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए जो पहली दवा उपलब्ध है, वो इसके लक्षणों से राहत देने वाली दवा है। लंबे समय में ये मुमकिन है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए वैक्सीन विकसित करना मुनाफे का कारोबार बन जाए।

जॉनसन एंड जॉनसन के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर पॉल स्टोफेल्स ने बीबीसी को बताया कि उनकी टीम ने इस वैक्सीन पर बुनियादी अध्ययन पहले ही कर लिया है। उन्हें लगता है कि साल भर के भीतर इस वैक्सीन की बात साकार हो सकती है। संक्रमण से बचने के लिए सर्जिकल मास्क और दस्तानों की मांग में भारी उछाल देखा गया है। ऐसी दवाइयां और सर्जिकल मास्क और ग्लव्स जैसे चीजें बनाने वाली चीनी कंपनियों के स्टॉक वैल्यू में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
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सार्स महामारी के समय

कोरोना से कैसे लड़ें, इसके ऐतिहासिक सबक संभवतः सार्स महामारी की घटना से लिए जा सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक सार्स महामारी के वक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था को 40 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा था। लंदन की कंसल्टेंसी फर्म कैपिटल इकोनॉमिक्स की जेनिफर मैक्क्वेन बताती हैं कि साल 2003 की दूसरी तिमाही में वैश्विक विकास की दर में में सार्स की वजह से एक फीसदी की गिरावट हुई थी। ये एक बड़ी गिरावट थी। लेकिन जेनिफर ये भी कहती हैं कि इसके बाद हालात तेजी से संभल गए थे। वो बताती हैं कि उस समय अर्थव्यवस्था में गिरावट की दूसरी वजहें भी थीं और इस वजह से दुनिया की आर्थिक गतिविधियों पर सार्स का कोई एक दुष्परिणाम बताना मुश्किल है। भले ही सार्स उस वक्त एक महामारी की तरह दुनिया में फैल गया था।

प्रभावित हो रहा नोएडा में कारोबार

चीन में कोरोना वायरस के प्रभाव से नोएडा में 25 फीसदी कारोबार प्रभावित हो गया है। उद्यमियों ने चीन जाना बंद कर दिया है। यहां के 80 फीसदी उद्योगों में चीन के उत्पादों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रयोग होता है। 25 मार्च तक उद्यमियों ने सभी बुकिंग व ऑर्डर निरस्त कर दिए थे। चीन के कुछ शहरों में फैले जानलेवा कोरोना वायरस की दहशत ने कारोबारियों को बेचैन कर दिया है। बुंदेलखंड के भी करीब 150 कारोबारियों ने चीन का टूर टाल दिया है। अकेले झांसी से ही हर माह 60 लोग कारोबार के सिलसिले में चीन जाते हैं।   
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