हाल ही में राज्यों द्वारा नए प्रतिबंधों के कारण कई हवाई उड़ानें रद्द कर दी गई थीं। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में कुछ यात्रियों को उन उड़ानों के लिए टिकटें बेची गई जिनकी प्लाइट शेड्यूल ही नहीं की गई थी या जो कम मांग के कारण बाद में रद्द का जानी थीं।
ऐसा ही कुछ सचिन शेट्टी के साथ हुआ। सचिन शेट्टी ने जून के दूसरे सप्ताह में मुंबई के मंगलौर नॉनस्टॉप उड़ान के लिए पांच जुलाई की तारीख की तीन टिकटें खरीदी थीं। फ्लाइट रवाना होने से चार दिन पहले, कंपनी ने उन्हें बताया कि उड़ान रद्द कर दी गई थी और उनके पैसे क्रेडिट शेल में डाल दिए गए थे। बाद में उन्हें पता चला कि मैंगलोर सीधी उड़ान से मुंबई से जुड़ा ही नहीं है, तो एयरलाइन ने उन्हें टिकट क्यों बेचा?
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, कारोबारी बृजेश सुतारिया ने 30 मई को सात जून के लिए मुंबई-दिल्ली फ्लाइट की टिकट बुक की थी। इसके अगले ही दिन, एयरलाइन ने उन्हें बताया कि फ्लाइट रद्द हो गई थी और उनके 4,200 रुपये क्रेडिट शेल में डाले गए हैं।
सुतारिया ने कहा कि, 'टिकट बुक करने के एक दिन बाद मुझे एयरलाइन से एक संदेश मिला कि परिचालन कारणों से उड़ान रद्द कर दी गई है।' क्या एयरलाइंस गैर-मौजूद उड़ानों की टिकटें बेच रही हैं? सुतारिया ने आरोप लगाया कि कंपनियां बिना किसी ब्याज के साथ 730 दिनों के लिए पैसे क्रेडिट शेल में जमा कर रही हैं।
उनका मानना है कि उन्हें मुंबई-दिल्ली की उड़ान के लिए टिकट बेची गई थी, जो कि निर्धारित ही नहीं थी। शेट्टी को एक गैर-मौजूद मुंबई-मैंगलोर फ्लाइट के लिए टिकट बेची गई। एयरलाइन ने संदेश में यह उल्लेख नहीं किया कि उड़ान रद्द क्यों की गई। एयरलाइन द्वारा रीशेड्यूल का विकल्प दिया गया, लेकिन उन्हें किसी अन्य दिन के लिए उड़ान नहीं मिली, इसलिए उनके पैसे क्रेडिट शेल में चले गए।