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Amar Ujala Samwad: अमर उजाला संवाद के मंच पर होंगे केंट आरओ के डॉ. महेश गुप्ता, जानिए उनके बारे में

Mon, 15 Dec 2025 05:39 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमर उजाला संवाद: 17 दिसंबर को गुरुग्राम में केंट आरओ के चेयरमैन डॉ. महेश गुप्ता बताएंगे फ्यूचर रेडी इंडस्ट्री का मंत्र। जानें एक गैराज से शुरू होकर 'प्योर वॉटर मैन ऑफ इंडिया' बनने की उनकी प्रेरणादायक कहानी।
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डॉ. महेश गुप्ता - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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हरियाणा के गुरुग्राम में 17 दिसंबर को होने वाले 'अमर उजाला संवाद' के मंच पर उद्योग जगत की एक ऐसी शख्सियत मौजूद रहेंगे, जिन्होंने भारत में पीने के पानी की परिभाषा बदल दी। हम बात कर रहे हैं केंट आरओ सिस्टम्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. महेश गुप्ता की, जिन्हें देश 'प्योर वॉटर मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जानता है। इस बार संवाद की थीम 'हरियाणा-स्वर्णिम शताब्दी की ओर' है, जहां डॉ. गुप्ता 'फ्यूचर रेडी इंडस्ट्री' विषय पर अपने विचार रखेंगे। आइए जानते हैं उस शख्स के बारे में जिसने एक गैराज से शुरुआत कर आज दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।

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डॉ. महेश गुप्ता की सफलता की कहानी किसी बोर्डरूम में नहीं, बल्कि एक पिता की चिंता से शुरू हुई। 1998 में, जब उनका बेटा पीलिया (Jaundice) से ग्रस्त हो गया, तो डॉ. गुप्ता को गहरा झटका लगा। उन्होंने महसूस किया कि बाजार में उपलब्ध वाटर प्यूरीफायर पानी से पूरी तरह बैक्टीरिया और अशुद्धियां निकालने में सक्षम नहीं थे।

आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और आईआईपी देहरादून से पेट्रोलियम कंजर्वेशन में मास्टर्स कर चुके डॉ. गुप्ता ने तब खुद कमान संभालने की ठानी। उन्होंने विदेशों से मेंब्रेन और पंप मंगवाए और अपने घर में ही कई प्रयोगों के बाद एक ऐसा आरओ सिस्टम तैयार किया जो न केवल पानी को शुद्ध करता था, बल्कि उसमें जरूरी मिनरल्स भी बचाए रखता था। यही आविष्कार आगे चलकर 'केंट आरओ' की नींव बना।

अमर उजाला संवाद में क्या होगा खास?

17 दिसंबर को होटल क्राउन प्लाजा, गुरुग्राम में होने वाले 'अमर उजाला संवाद' में डॉ. महेश गुप्ता का सत्र बेहद खास होने वाला है। वे बताएंगे कि कैसे भारतीय इंडस्ट्री भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकती है। एक तकनीक-प्रेमी उद्यमी के रूप में, वे ऑटोमेशन, एआई (AI) और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे विषयों पर युवाओं और उद्यमियों को नई दिशा देंगे। डॉ. महेश गुप्ता का जीवन यह साबित करता है कि अगर इरादे पक्के हों और सोच में समाज की भलाई हो, तो एक छोटी सी शुरुआत भी एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले सकती है।

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