साल 2022 निवेशकों के साथ आम लोगों के लिए भी कई मायने में काफी चुनौतिपूर्ण रहा। इस दौरान न सिर्फ बढ़ी महंगाई का सामना करना पड़ा बल्कि शेयर बाजार में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वैश्विक मंदी की आशंका से बड़े स्तर पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया। दुनियाभर में अनिश्चितता की वजह से वित्तीय स्थिरता रही। क्रिप्टोकरेंसी में भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा। इन मुश्किलों ने आम लोगों की वित्तीय योजनाएं ध्वस्त कर दीं। नए साल में भी इन चुनौतियों से फिलहाल पीछा नहीं छूटने वाला है।
जानकारों का कहना है कि पिछले साल की चुनौतियों ने कई सबक दिए। कई बार अच्छी तैयारियों के बावजूद जब वित्तीय योजनाएं बनाने की बात आती है तो लोग कुछ-न-कुछ गलतियां कर देते हैं। इसलिए नए साल में अगर आप पांच बातों का ध्यान रखकर वित्तीय योजना बनाते हैं तो मुश्किलों से निपटने में आसानी होगी।
तय अवधि से पहले चुकाएं कर्ज
आरबीआई ने दो साल के बाद मई, 2022 में पहली बार ब्याज दर में बढ़ोतरी की। तब से अब तक रेपो दर में 2.25% वृद्धि हो चुकी है। इससे हर प्रकार के कर्ज महंगे हो गए हैं, जिससे लोगों पर मासिक किस्त (ईएमआई) का बोझ भी बढ़ गया है। जेब पर बढ़े इस बोझ ने बताया कि ब्याज दरों में वृद्धि का मुकाबले कैसे करें। साथ ही यह भी सबक मिलता है कि तय अवधि से पहले आप पूरा कर्ज चुका दें।
लंबी अवधि के लिए लगाएं पैसा
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से 2022 की पहली छमाही में शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। इस दौरान निवेशकों ने अपने शेयर बेच दिए। लेकिन, दूसरी छमाही में शेयर बाजार में तेजी रही और बाजार अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
इससे निवेशकों को दूसरी छमाही में काफी फायदा हुआ। इसका मतलब यह है कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश करना बेहतर होता है। इस दौरान अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं तो उसी हिसाब से ज्यादा रिटर्न मिलने की गुंजाइश रहती है।
अनियमित निवेश से बरतेें दूरी
क्रिप्टो को लेकर पिछले साल युवाओं में काफी आकर्षण रहा क्योंकि इसने कम समय में निवेशको को ज्यादा रिटर्न दिया। हालांकि, अनियमित निवेश का माध्यम होने की वजह से क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए काफी जोखिम भरा रहा। इसके मूल्यांकन में हुई भारी गिरावट से दुनियाभर के निवेशकों को बड़ा झटका लगा।
जानकारों का कहना है, इस झटके से निवेशकों का बड़ा सबक मिला कि जिस योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी न हो तो उसमें निवेश न करें। साथ ही किसी भी योजना में पैसा लगाने से जोखिम की भी जानकारी रखें।
खर्च से पहले निवेश जरूरी
रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की महंगाई ने परिवारों की मासिक बजट बढ़ा दी है। जिन लोगों ने निवेश किया था, उन्हें महंगाई से निपटने में खास मशक्कत नहीं हुई। महंगाई सिखाती है कि बढ़े खर्च से निपटने के लिए निवेश जरूरी है। इसके लिए योजनाओं की समीक्षा करें। और वहीं पैसा लगाएं, जिसमें वृद्धि दिखे।
जरूर बनाएं आपात फंड
मंदी की आशंका से बड़े स्तर पर छंटनी हुई। कमाई बंद होने से महंगाई के दौर में परिवार चलाना मुश्किल हो गया। हालांकि, छंटनी के कारण पैदा विपरीत हालात में उन्हें थोड़ी राहत मिली, जिन्होंने आपात फंड बना रखा था। इसलिए आप भी आपात फंड में इतनी राशि जरूर रखें कि कम-से-कम 6 महीने तक खर्च चल सके।
अधिक रिटर्न के लिए करें एफडी : रेपो दर बढ़ने के बाद बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ब्याज दरों में इजाफा किया है। ज्यादातर बैंक चुनिंदा मैच्योरिटी वाले एफडी पर 7% या इससे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। आप भी चाहें तो छोटी अवधि के लिए एफडी में पैसा लगा सकता हैं।
-जनार्दन केशरी, निवेश सलाहकार