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Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन की याचिका पर ईडी से मांगा जवाब, सिब्बल ने की पूर्व सीएम की पैरवी

Tue, 28 May 2024 11:17 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jharkhand: न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ के समक्ष सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि झामुमो नेता राजनीतिक साजिश के शिकार हुए हैं। अदालत ने ईडी को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई की अगली तारीख 10 जून तय की।
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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झारखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एक कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 31 जनवरी को गिरफ्तार किए गए सोरेन ने सोमवार को उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की और मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया।  

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न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय की पीठ के समक्ष सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि झामुमो नेता राजनीतिक साजिश के शिकार हुए हैं। अदालत ने ईडी को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई की अगली तारीख 10 जून तय की। अपनी याचिका में सोरेन ने अदालत से कहा कि उनका नाम साढ़े आठ एकड़ जमीन की सौदेबाजी के किसी भी दस्तावेज में नहीं है और उनके खिलाफ धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत कोई अपराध नहीं बनता।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी केवल कुछ लोगों के बयानों पर भरोसा कर रहा है, जिन्होंने कहा है कि जमीन उनका (हेमंत सोरेन का) है, लेकिन ऐसे बयानों की पुष्टि के लिए कोई दस्तावेज नहीं है। सोरेन ने 31 जनवरी को अपनी गिरफ्तारी से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और अब वह झारखंड की राजधानी रांची के होटवार में बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। उन पर रांची के बार्गेन में एक प्लॉट के लिए जमीन के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है।
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सोरेन ने दलील दी कि जमीन का मालिक राजकुमार पाहन नाम का व्यक्ति है, जिसने बार्गेन सर्कल अधिकारी के कार्यालय में शिकायत की थी कि उसकी जमीन पर कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि पाहन ने कहीं भी हेमंत सोरेन के नाम का उल्लेख नहीं किया था, फिर भी ईडी ने दावा किया कि जमीन उनके (सोरेन के) कब्जे में थी। इससे पहले सोरेन को 22 मई को उच्चतम न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली थी। अदालत ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका में 'तथ्यों को छिपाने' के लिए उन्हें फटकार लगाई थी।   

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने सोरेन के वकील कपिल सिब्बल को लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत और उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दे दी थी।

अदालत ने अभियोजन की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कहा कि सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत के चार अप्रैल के आदेश से अवगत नहीं कराया। इसके अलावे उन्होंने इस बात से भी अवगत नहीं कराया कि उनकी नियमित जमानत याचिका 15 अप्रैल को दायर की गई थी और 13 मई को खारिज कर दी गई थी।

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