हर निर्णय है महत्वपूर्ण
कर्मचारियों ने लिखा है कि 'एयरलाइन को तत्काल धन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आपसे आग्रह करते हुए हम कहना चाहते हैं कि इस चुनौतीपूर्ण समय में हर मिनट और हर निर्णय बहुत महत्वपूर्ण है।'
17 अप्रैल से बंद किया परिचालन
कई महीनों की अनिश्चितता के बाद जेट एयरवेज ने 17 अप्रैल को अपना परिचालन अस्थाई रूप से निलंबित कर दिया। विमानन कंपनी को रिणदाताओं से आपात रिण सहायता नहीं मिलने की वजह से यह कदम उठाना पड़ा।
दोबारा शुरू होने के लिए जून तक इंतजार
जेट एयरवेज की उड़ानों को दोबारा पंख मिलने के लिए नई सरकार का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव पूरा होने के बाद ही कंपनी के विमान उड़ने की उम्मीद है। तब तक नागर विमानन मंत्रालय, बैंक और मामले से जुड़े अन्य संस्थान अपना होमवर्क ही निबटाएंगे।
जेट एयरवेज के पूर्व सीनियर कमांडर और बाद में प्रबंधन की भूमिका में आए एक कैप्टन ने अमर उजाला को बताया कि जब तक सरकारी बैंकों के कंसोर्शियम या किसी निवेशक से बड़ी रकम नहीं आएगी, विमान उड़ नहीं पाएंगे। जेट एयरवेज से जिन भी बैंकों का संबंध है, वे सरकारी हैं। ऐसे में अब जो भी होगा, चुनाव बाद ही होगा।
बैंकों को गर्दन फंसने का डर
एसबीआई के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जेट एयरवेज को आपात फंड का फैसला एमडी एवं सीईओ या फिर बैंक का निदेशक मंडल करेगा। ऐसे में अगर कुछ वर्ष बाद यह कदम गलत साबित होता है तो उनकी गर्दन फंसना तय है। इतना नहीं उन्हें सीबीआई व अन्य एजेंसियों का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा अभी वेट एंड वॉच की रणनीति ही अपनाएंगे और नई सरकार बनने के बाद मिल-बैठकर फैसला करेंगे।
लिखित में नहीं दे रही सरकार
मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि कई बार अनौपचारिक या मौखिक रूप से सरकार ने बैंकों को जेट एयरवेज की मदद करने को कहा है, लेकिन लिखित तौर पर कुछ नहीं दिया। यही कारण है कि एसबीआई सहित अन्य बैंक अभी फंडिंग करने से परहेज कर रहे हैं। हालांकि, सरकार के संकेत पर नरेश गोयल ने चेयरमैन पद छोड़ दिया था। फिलहाल निवेश की तलाश जारी रखना ही बैंकों के पास एकमात्र विकल्प है।