वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार का एशिया के दूसरे बाजारों की तुलना में खराब प्रदर्शन घरेलू कंपनियों के शेयरों की महंगे वैल्यूएशन के कारण रहा है। इसके चलते 2025 के बाकी समय में अच्छा कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले साल अक्तूबर में गिरावट का दौर आया, जिसका असर अब तक देखा जा रहा है। चुनिंदा मौकों को छोड़कर अब भी बाजार में अधिकांश समय उठा-पटक ही बनी हुई है। 2025 के बाकी बचे महीनों में भी यह जारी रह सकता है।
विज्ञापन
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि भारतीय शेयर बाजार का एशिया के दूसरे बाजारों की तुलना में खराब प्रदर्शन घरेलू कंपनियों के शेयरों की महंगे वैल्यूएशन के कारण रहा है। इसके चलते 2025 के बाकी समय में अच्छा कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है।
बगैर म्यूचुअल फंड के 20-30% गिर सकते थे शेयर
ग्रीड एंड फियर रिपोर्ट के लेखक क्रिस वुड ने कहा कि म्यूचुअल फंड कंपनियां भारतीय शेयरों में भारी निवेश कर रही हैं, जिसके चलते भारतीय बाजार संभला हुआ है। म्यूचुअल फंड निवेश के बगैर, इस साल विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण शेयर की कीमतें 20 से 30 फीसदी और कम हो सकती थीं।
1.40 लाख करोड़ की बिकवाली
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक इस साल अब तक भारतीय शेयरों से शुद्ध रूप से 1,40,394 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं। इस साल 6 महीने विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है। सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 9,759 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। जुलाई और अगस्त में उन्होंने क्रमश: 17,741 करोड़ और 34,993 करोड़ शेयर के शेयरों की शुद्ध बिकवाली थी।