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JAL अधिग्रहण मामला: सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका, अदाणी की ₹14535 करोड़ की बोली पर नहीं लगाई रोक

Mon, 06 Apr 2026 01:10 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे जेएएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी। हालांकि, कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी को बिना NCLAT की अनुमति कोई बड़ा फैसला लेने से रोक दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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भारत के कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल)  के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इस मामले में सभी पक्ष खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी दलीलें एनसीएलएटी के सामने रखें। अदालत ने एनसीएलएटी को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

दरअसल, वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनसीएलएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।

इससे पहले:

  • 24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से इनकार किया था।
  • 25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
  • एनसीएलएटी ने जेएएल के कर्जदाताओं की समिति (CoC) से जवाब मांगा था।

 

अधिग्रहण की कहानी

जेएएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और इसके अधिग्रहण के लिए कई कंपनियां दौड़ में थीं। अंततः नवंबर में कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी, जिसे बाद में कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भी हरी झंडी दे दी।

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वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर की हैं

  • रेजोल्यूशन प्लान की वैधता पर सवाल।
  • सीओसी और एनसीएलटी द्वारा मंजूरी पर आपत्ति।

अब आगे क्या?

अब इस पूरे मामले का फैसला एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई पर टिका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से साफ है कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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