धोखाधड़ी कर ग्राहक के बैंक खाते से निकाले थे 94,204 रुपये
सुप्रीम कोर्ट ने अनधिकृत लेनदेन के जिस मामले में बैंकों की जिम्मेदारी तय की है, उसमें गुवाहाटी हाईकोर्ट ने ग्राहक को राशि लौटाने का आदेश दिया था, जिसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ग्राहक के बैंक खाते से हुए अनधिकृत लेनदेन के लिए एसबीआई को जिम्मेदार ठहराया था। ग्राहक के बैंक खाते से 94,204.80 रुपये अनधिकृत लेनदेन हुआ था।
इस मामले के मुताबिक ग्राहक ने ऑनलाइन शॉपिंग की और बाद में खरीदे सामान को वापस करने की कोशिश की। उसे रिटेलर के कस्टमर केयर के रूप में खुद को पेश करने वाले एक धोखेबाज का फोन आया। निर्देशों का पालन करते हुए उसने एक मोबाइल एप डाउनलोड किया। इसके चलते उसके बैंक खाते से 94,204.80 रुपये का अनधिकृत लेनदेन हुआ। एसबीआई ने ग्राहक के ओटीपी और एम-पिन साझा करने के कारण लेन-देन को अधिकृत बताते हुए जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया।
वहीं, ग्राहक ने दावा किया कि उसने कभी भी ओटीपी या एम-पिन जैसी संवेदनशील जानकारी साझा ही नहीं की। धोखाधड़ी रिटेलर की वेबसाइट पर डाटा उल्लंघन के कारण हुई, जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था। ब्यूरो
आरबीआई का सर्कुलर यह कहता है
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आरबीआई के 6 जुलाई, 2017 के सर्कुलर के खंड 8 और 9 का हवाला दिया था। इसके अनुसार, धोखाधड़ी व अनधिकृत लेन-देन की तुरंत रिपोर्ट की जाती है तो तीसरे पक्ष के डाटा उल्लंघन के कारण ग्राहक के बैंक खाते से हुए अनधिकृत लेन-देन के लिए ग्राहकों पर शून्य देयता हो जाती है।