देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने दिसंबर में शून्य से फरवरी तक अपना क्रू बफर बढ़ाकर 3% कर लिया है। साथ ही पायलट-टू-एयरक्राफ्ट अनुपात भी मजबूत किया है। इन सुधारों के बाद सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को उम्मीद है कि पायलट ड्यूटी और विश्राम से जुड़े नियमों (FDTL) पर दी गई अस्थायी छूट खत्म होने के बावजूद उड़ानों में न्यूनतम ही बाधा आएगी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अब एयरलाइन ने रोस्टरिंग योजनाओं में सुधार करते हुए प्रति विमान पायलट क्रू सेट की संख्या बढ़ा दी है। फरवरी के रोस्टर में यह औसतन 7.2 क्रू सेट प्रति विमान तक पहुंच गई है, जो जनवरी में 7.1 थी। दिसंबर के संकट के समय यह संख्या छह से भी कम थी। क्रू सेट का मतलब है हर विमान के लिए उपलब्ध पूर्ण पायलट टीमों की संख्या।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2025 में जहां क्रू बफर शून्य था, वह फरवरी में बढ़कर 3% हो गया है, जबकि स्टैंडबाय क्रू की न्यूनतम सीमा 15% तक कर दी गई है। इससे बीमारी, आकस्मिक अवकाश या शेड्यूल में गड़बड़ी की स्थिति में उड़ानों को संभालने की क्षमता बढ़ी है।
हालांकि, विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों का आकलन नए एफडीटीएल नियमों के संदर्भ में जरूरी है। विशेषज्ञ कैप्टन मोहन रंगनाथन के अनुसार, सुचारू संचालन के लिए प्रति विमान कम से कम सात क्रू सेट होना अनिवार्य है। अगर DGCA को दिए गए आंकड़े वास्तव में उड़ान भर रहे विमानों के अनुरूप हैं, तो व्यवधान की आशंका नहीं होगी।
मंत्रालय की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि जनवरी में हुई उड़ान रद्दियां मुख्य रूप से खराब मौसम, एयरस्पेस प्रतिबंध और अन्य परिचालन कारणों से थीं, न कि पायलट ड्यूटी नियमों के उल्लंघन से। 15 से 31 जनवरी के बीच इंडिगो ने लगभग 90% निर्धारित सेवाएं संचालित कीं और कुल 284 उड़ानें रद्द हुईं।