दो दिसंबर की सुबह ही यह गाड़ी दिल्ली सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना हो जाएगी और दूसरे दिन सुबह गया पहुंच जाएगी। वहां से यात्रियों को विष्णुपद मंदिर ले जाया जाएगा। वहां जो श्रद्धालु अपने पितरों को पिंडदान करना चाहें, उन्हें इसका भी अवसर मिलेगा, लेकिन उन्हें अपने खर्च पर पंडा की सेवा लेनी होगी। इसके बाद शाम में गाड़ी पुरी के लिए रवाना हो जाएगी।
अगले दिन गाड़ी पुरी पहुंच जाएगी। वहां दिन में जगन्नाथपुरी का मंदिर भ्रमण कराया जाएगा। रात्रि विश्राम पुरी में ही होगा। उसके बाद अगले दिन यात्रियों को कोणार्क का सूर्य मंदिर दिखाया जाएगा। इसके बाद पर्यटक गंगासागर भ्रमण के लिए शालीमार को रवाना हो जाएंगे।
पांचवें दिन गाड़ी सुबह ही शालीमार पहुंच जाएगी। वहां से पर्यटकों को नॉन एसी आरामदेह बस से गंगासागर ले जाया जाएगा। वहां पवित्र नदी गंगा के सागर में मिलन का दृश्य दिखाने के बाद पर्यटकों का वहां के मंदिर का भ्रमण कराया जाएगा। उसके बाद रात्रि विश्राम की वहीं व्यवस्था होगी।
अगले दिन यात्री कोलकाता आएंगे जहां काली मंदिर का दर्शन कराया जाएगा। उस दिन रात में गाड़ी वैद्यनाथ धाम जाने केलिए जसीडीह को रवाना हो जाएंगे। सातवें दिन गाड़ी जीसडीह पहुंचेगी जहां से रावणेश्वर महादेव का दर्शन कराया जाएगा। इसके बाद आठ दिसंबर को शाम में गाड़ी वापसी यात्रा पर निकाल जाएगी और नौ दिसंबर की रात दिल्ली पहुंच जाएगी।
शुल्क में भाड़े के साथ शामिल हैं सभी आवश्यक खर्चे
इस पैकेज में प्रतिदिन 945 रुपये के हिसाब से शुल्क तय किया गया है, जिसमें सेवा कर भी शामिल है। इसी शुल्क में हर वक्त का खाना-पीना, चाय, रेलवे स्टेशन से आरामदायक बसों में भ्रमण, जरूरत पड़ने पर धर्मशाला या किसी डोरमेट्री में रात्रि विश्राम आदि भी शामिल है।
आईआरसीटी की तरफ से चलाये गए इस विशेष ट्रेन में सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था होती है और जरूरत पड़ने पर यात्रियों को चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है। भारत दर्शन योजना केन्द्र सरकार की योजना है ताकि सस्ते में लोग देश का दर्शन कर सके।
जब यह योजना शुरू हुई थी, उस समय इसका दैनिक शुल्क 500 रुपये था। लेकिन कालांतर में महंगाई का असर इस पर भी पड़ा और अब इसका शुल्क 945 रुपये प्रतिदिन हो गया है।