अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमलों के छठे दिन युद्ध का दायरा अब मिडिल ईस्ट की सीमाओं को पार कर हिंद महासागर तक फैल चुका है। एक तरफ जहां ईरान के 33 नागरिक और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आइए, एक विस्तृत सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि युद्ध के मौजूदा हालात, भू-राजनीतिक समीकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके क्या असर हो रहे हैं।
ईरानी स्टेट मीडिया के मुताबिक, हमलों के पांच दिनों में अब तक 1,045 लोगों की मौत हो चुकी है और 6,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि अमेरिका और इस्राइल ने 33 नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें अस्पताल, स्कूल, तेहरान का प्रमुख आर्थिक केंद्र 'ग्रैंड बाज़ार' और ऐतिहासिक गोलस्तान पैलेस शामिल हैं। इस बीच, कुर्दिश-ईरानी सशस्त्र समूहों ने उत्तर-पश्चिमी ईरान में सरकार के खिलाफ जमीनी हमला भी शुरू कर दिया है।
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई देश के अगले सर्वोच्च नेता के रूप में सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं, जिनके इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ गहरे संबंध हैं। सैन्य मोर्चे पर, श्रीलंका के तट के पास हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत 'आइरिस डेना' को टारपीडो से डुबा दिया है, जिसमें 87 शव बरामद हुए हैं।
वैश्विक व्यापार के लिए हालात बेहद गंभीर हैं क्योंकि आईआरजीसी ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी है, इससे समुद्री व्यापार लगभग ठप हो गया है। वहीं, कूटनीतिक मोर्चे पर स्पेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी है। इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी तरह का व्यापार बंद करने की कड़ी धमकी दी है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे भारत सहित एशिया के बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है।
ईरान के जवाबी हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तेल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हो रही है। कुवैत के मुबारक अल-कबीर के पास खड़े एक तेल टैंकर के करीब विस्फोट हुआ है। इसके अलावा, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी ड्रोन हमले की निंदा की गई है। बढ़ते खतरों को देखते हुए कतर अपने यहां अमेरिकी दूतावास के आसपास के निवासियों को निकाल रहा है।
इस्राइयल सेना ने तेहरान में सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमलों की नई लहर की घोषणा की है। अमेरिकी और पश्चिमी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमताओं के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया है। व्हाइट हाउस इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कह रहा है कि उनका लक्ष्य ईरान के नौसेना और परमाणु अरमानों को खत्म करना है; राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, अगर यह हमला नहीं होता तो ईरान दो सप्ताह के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लेता। हालांकि, एक पोल के अनुसार केवल 25 प्रतिशत अमेरिकी जनता इस युद्ध का समर्थन कर रही है।
यह युद्ध लेबनान तक पहुंच गया है, जहां इस्राइल बेरूत पर हमले कर रहा है और हिजबुल्लाह के साथ भारी गोलीबारी हो रही है। नाटो के वायु रक्षा सिस्टम ने एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को तुर्की के हवाई क्षेत्र में मार गिराया है, जो कि खाड़ी से बाहर के देशों को लपेटने का एक प्रयास माना जा रहा है। उत्तरी इराक में कुर्दिश बल ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए 'स्टैंडबाय' पर हैं, जबकि चीन ने अमेरिका और इस्राइल के इस सैन्य अभियान को तुरंत रोकने की मांग की है।
यह संघर्ष अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने लेबनान से लेकर हिंद महासागर तक एक व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक संकट का रूप ले लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन के लिए एक रेड फ्लैग है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक पहल इस महासंकट को शांत कर पाएगी या वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नए और विनाशकारी झटके का सामना करना पड़ेगा।