पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चौथे सप्ताह में वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की चिंताओं के बीच अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। हालांकि, ईरान ने यह कहकर बाजार को चौंका दिया है कि उसके पास अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए कोई अतिरिक्त कच्चा तेल उपलब्ध नहीं है, जो कंटेनर पर लोड हो चुका हो।
अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए प्रतिबंधों में अस्थायी राहत दी है। यह छूट 20 मार्च 2026 तक लोड हुए तेल वाले जहाजों पर लागू होगी। यह 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। अमेरिका में ईरानी कच्चे तेल और उत्पादों के आयात को भी मंजूरी मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आपूर्ति दबाव कम करना मुख्य उद्देश्य बताया। अमेरिका का अनुमान था कि इससे करीब 14 करोड़ बैरल तेल तुरंत बाजार में आएगा।
ईरान के तेल मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम का कड़ा खंडन किया है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने अतिरिक्त तेल उपलब्ध न होने की बात कही। ईरान ने अमेरिकी टिप्पणियों को केवल खरीदारों को आश्वस्त करने का प्रयास बताया। ईरान के इस इनकार से कच्चे तेल का बाजार और अधिक डगमगा सकता है। बाजार पहले से ही कीमतों में भारी उछाल का सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक जलमार्ग अधिकांश समुद्री यातायात के लिए बंद है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भारी दबाव बना है। अमेरिका ने ईरान पर अपना 'अधिकतम दबाव' बनाए रखने की बात कही है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' भी जारी रहेगा, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी। अमेरिका का लक्ष्य तेल की कीमतें कम करना और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना था। हालांकि, ईरान के दावे से आपूर्ति में जल्द राहत के आसार कम दिख रहे हैं। मौजूदा हालात ऊर्जा बाजारों में आगे भी अस्थिरता जारी रहने का संकेत दे रहे हैं।