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ईरान संकट, कमजोर मानसून: भारत पर महंगाई आधारित मंदी का खतरा, नुवामा की रिपोर्ट में चेतावनी

Sat, 06 Jun 2026 06:20 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नुवामा ने ईरान संकट और कमजोर मानसून के कारण भारत में मुद्रास्फीतिजनित मंदी के बढ़ते जोखिम की चेतावनी दी है। वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान घटाया गया, जबकि घरेलू कारक कुछ राहत दे सकते हैं।
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नुवामा की रिपोर्ट - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट से तेल आपूर्ति में संभावित बाधा भारत के लिए महंगाई आधारित मंदी का जोखिम बढ़ा सकती है। नुवामा नामक वित्तीय सेवा फर्म ने अपनी सकल घरेलू उत्पाद विश्लेषण रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है। यह तब हुआ है जब देश की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026 को उम्मीद से बेहतर वृद्धि के साथ समाप्त किया।

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वित्तीय सेवा फर्म ने आगाह किया कि वित्त वर्ष 2027 अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मार्च तिमाही में स्वस्थ आर्थिक गतिविधि के बावजूद यह आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से इनपुट लागत ऊंची रह सकती है। इससे परिवारों की वास्तविक आय पर भी असर पड़ेगा। अर्थव्यवस्था पहले से ही मुद्रास्फीति के दौर में है। एक लंबा आपूर्ति झटका, खासकर कमजोर मानसून के साथ, मुद्रास्फीतिजनित मंदी का जोखिम बढ़ाता है। 

महंगाई आधारित मंदी वह स्थिति है जब आर्थिक वृद्धि धीमी होती है और महंगाई ऊंची बनी रहती है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि 7.8 फीसदी रही थी। पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि वित्त वर्ष 2025 के 7.1 फीसदी से बढ़कर 7.7 फीसदी हो गई थी।

वृद्धि अनुमान में कटौती

नुवामा ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि अनुमान को घटाकर 6-6.5 फीसदी कर दिया है। हालांकि, नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद 11-12 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। यह संशोधन ईरान संकट से जुड़ी ऊंची तेल कीमतों के प्रभाव के कारण हुआ है। ऊंची इनपुट लागत से परिवारों और कारोबारों पर दबाव पड़ सकता है।

घरेलू कारक दे सकते हैं सहारा

रिपोर्ट में कुछ घरेलू कारकों का भी उल्लेख किया गया है जो नकारात्मक जोखिमों को सीमित कर सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक का कुशल तरलता प्रबंधन इसमें सहायक होगा। रुपये का अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन और स्वस्थ ऋण वृद्धि भी गिरावट को कम करने में मदद कर सकती है। वित्त वर्ष 2026 में निवेश में तेजी आई थी, जो मार्च तिमाही में 10.8 फीसदी तक पहुंच गया।

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