ईरान द्वारा अमेरिका के इराक में स्थित सैन्य ठिकानों पर एक दर्जन से अधिक मिसाइलों से हमला करने के बाद भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर इसका असर देखने को मिलेगा। ताजा संकट से भारत में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस सहित सोना और हवाई किराये में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत में अपनी जरूरतों का 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इनमें से भी ज्यादातर कच्चा तेल खाड़ी देशों से आता है। कुवैत, इराक, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करते हैं। यह कच्चा तेल हर्मज की खाड़ी से आता है। ईरान जल्द ही पलटवार करते हुए होरमुज जलमार्ग को बंद कर सकता है। अगर यह जलमार्ग बंद होता है तो दुनिया में तेल के लिए हाहाकार मच सकता है। रणनीतिक रूप से होरमुज जलडमरूमध्य तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता माना जाता है।
इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा। केडिया कमोडिटी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में साल की शुरुआत से इजाफा हो रहा है। हालांकि बुधवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिली है।
दिल्ली, कोलकता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल का दाम बिना किसी बदलाव के क्रमश: 75.74 रुपये, 78.33 रुपये, 81.33 रुपये और 78.69 रुपये प्रति लीटर बना हुआ था। वहीं, चारों महानगरों में डीजल की कीमत भी क्रमश: 68.79 रुपये, 71.15 रुपये, 72.14 रुपये और 72.69 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बनी रही। हालांकि संकट के बढ़ने से पेट्रोल भविष्य में 90 रुपये प्रति लीटर तक जा सकता है। डीजल की कीमतें भी 85 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को छू सकती हैं।
केडिया के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है। बुधवार को रुपये की कमजोरी के साथ शुरुआत हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे की कमजोरी के साथ 72.02 के स्तर पर खुला है। वहीं, पिछले कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले रुपया 10 पैसे मजबूत होकर 71.83 के स्तर पर बंद हुआ था। अगर दोनों देशों के बीच संकट बढ़ता है तो फिर रुपया 74 तक जा सकता है।
इस संकट का असर सोने-चांदी की कीमतों में भी देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में सोना 44 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। केडिया के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1750 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। वहीं चांदी 20 डॉलर के पार जाती है।
समुद्री रास्तों के जरिए होने वाला करीब एक तिहाई तेल कारोबार इस समुद्री मार्ग से होता है। यूनाइटेड स्टेट्स एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन का आकलन है कि 2016 में इस जलमार्ग से हर दिन 1.85 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरा था। यह सागर के जरिए एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले कुल तेल का करीब 30 फीसदी है। फिलहाल वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की प्रतिदिन खपत लगभग 10 करोड़ बैरल है। इस लिहाज से दुनिया के तेल का तकरीबन 20 फीसदी यहां से गुजरता है।
विमान नियामक डीजीसीए ने सभी एयरलाइन कंपनियों से ताजा संकट को देखते हुए खाड़ी देशों की हवाई सीमा को इस्तेमाल करने से मना कर दिया है। ऐसे में अब अमेरिका, यूरोप और रूस की तरफ जाने वाले विमान दुबई से रास्ता नहीं ले पाएंगे।