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आईपीओ : कम समय में मिलता है ज्यादा फायदा; छोटी कंपनियों में है ज्यादा लाभ

Mon, 31 Jul 2023 10:24 AM IST
Jeet Kumar अजीत सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय शेयर बाजार में इस समय 5,000 से ज्यादा कंपनियां सूचीबद्ध हैं। इसमें से करीब सारी कंपनियां आईपीओ लाकर सूचीबद्ध हुई हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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भारतीय शेयर बाजार में इस समय 5,000 से ज्यादा कंपनियां सूचीबद्ध हैं। इसमें से करीब सारी कंपनियां आईपीओ लाकर सूचीबद्ध हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान कुछ ऐसी कंपनियां रही हैं, जिनके आईपीओ को सैकड़ों गुना सब्सक्रिप्शन मिला है। सैकड़ों ऐसी कंपनियां रही हैं जिन्होंने कम पैसा जुटाया, पर इनके शेयरों ने निवेशकों को मालामाल किया है। लेकिन कुछ ऐसी कंपनियां भी रही हैं जिन्होंने निवेशकों के पैसे डुबाने में भी कामयाबी हासिल की है। 

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विश्लेषक बताते हैं कि अगर आप सावधानी से और जांच परख कर अच्छे सेक्टर वाली कंपनियों के शेयरों में पैसे लगाते हैं तो आपको महज एक हफ्ते में ही अच्छा खासा फायदा हो सकता है। किसी भी कंपनी को आईपीओ लाने के बाद उसे 6 दिन में शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराना होता है।

तेजी में है शेयर बाजार
ट्रेडिंगो के संस्थापक पार्थ न्याति बताते हैं कि इस समय बाजार तेजी में हैं। इससे कंपनियों को पूंजी जुटाने में मदद मिल रही है। बाजार की तेजी कई वर्षों तक रहेगी और ऐसे में कंपनियां अच्छी खासी पूंजी भी जुटाएंगी। कुछ आईपीओ तुरंत लाभ देते हैं तो कुछ लंबे समय में देते हैं। ऐसे में यह हर निवेशक के निवेश के लिए अच्छा अवसर होता है।  
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ज्यादा पैसा जुटाने वाली कंपनियों ने दिया घाटा
जिन कंपनियों ने बहुत ज्यादा पैसा जुटाया, उनके शेयरों ने घाटा दिया है। अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने वाली एलआईसी के शेयर ने सूचीबद्धता के समय करीब 8% का घाटा दिया था। इसने 21 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम जुटाई थी। 

पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्यूनिकेशन ने 18,300 करोड़ रुपये जुटाए थी। इसने सूचीबद्धता के समय 28 फीसदी घाटा दिया। इन दोनों कंपनियों के शेयर कभी भी आईपीओ के भाव पर नहीं पहुंच पाए हैं और आज भी ये निवेशकों को घाटा दे रहे हैं।

जल्दी सूचीबद्ध होंगे शेयर
निवेशकों की सहूलियत के लिए सेबी ने शेयरों को सूचीबद्ध करने की समय सीमा घटा दी है। अभी 6 दिन में सूचीबद्ध होने वाले शेयर इसी साल से तीन दिन में सूचीबद्ध होंगे। सितंबर से इसे स्वैच्छिक और दिसंबर से अनिवार्य लागू किया जाएगा। इसके पीछे यह उद्देश्य है कि निवेशकों को शेयरों का आवंटन न हो तो उन्हें जल्दी पैसे वापस मिल जाएं, ताकि वे अगले आईपीओ में पैसे लगा सकें।

सावधानी से करें निवेश
अगर सही कंपनी है और आपने उसके आईपीओ में पैसा लगाया है तो आपको केवल 6 दिन में अच्छा फायदा मिलता है। अगर आपको आईपीओ में शेयरों का आवंटन मिल गया तो इन 6 दिनों में अच्छा लाभ होता है। हालांकि, ऐसा हर कंपनी के आईपीओ में नहीं होता है। पर जांच परख और सावधानी के साथ निवेश किया जाता है तो जरूर फायदा होने की उम्मीद होती है।

रिलायंस पावर और जीआईसी भी घाटे वाली 
सबसे अधिक पूंजी जुटाने में रिलायंस पावर भी रही है। 2007 में बाजार की भारी तेजी में यह जनवरी, 2008 में आईपीओ लाई थी। उस समय सबसे बड़ा 11,563 करोड़ का आईपीओ था। इसके शेयर ने सूचीबद्धता के समय 17 फीसदी का घाटा दिया था। इसके बाद पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ गई थी। 

2010 में कोल इंडिया इश्यू लेकर आई। उस समय यह सबसे बड़ा इश्यू था जिसने 15,199 करोड़ रुपये जुटाए। हालांकि इसके शेयर ने 39 फीसदी का फायदा दिया था। जनरल इंश्योरेंस ने 2017 में 11,175 करोड़ रुपये जुटाई लेकिन इसके शेयर ने 5 फीसदी का घाटा दिया था।

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