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INX मीडिया केस: क्या विदेशी निवेश से जुड़े FIPB बोर्ड ने की थी गड़बड़ी?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 22 Aug 2019 01:26 PM IST
पी चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री (फाइल फोटो)
केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें आरोप था कि आईएनएक्स मीडिया कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए विदेशी निवेश को स्वीकृति देने वाले विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) ने कई तरह की गड़बड़ियां की थीं। जिस वक्त कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी, उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसलिए बुधवार देर रात पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस में भष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
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पूरा मामला आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) से गैर कानूनी तौर पर मंजूरी दिलवाने से जुड़ा है। इसमें आईएनएक्स ने 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश हासिल किया था। इस केस में गड़बड़ी की आंच कार्ति चिदंबरम के जरिए तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम तक पहुंची और 15 मई 2017 में सीबीआई ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी में अनियमितताओं के चलते पहली एफआईआर दर्ज की।

यह भी पढ़ें: करोड़ों ग्राहकों को RBI का तोहफा, बैंक ने बढ़ाया RTGS का समय
 

क्या है एफआईपीबी ?

फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) एक ऐसी एजेंसी थी जो देश में निवेश संवर्धन करने के साथ-साथ एफडीआई से संबंधित मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करती थी। एफआईपीबी उन एफडीआई प्रस्तावों का आकलन करता रहा है, जिनके लिए सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है।

1990 के दशक में हुई थी शुरुआत

1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड का गठन किया गया था। बाद में 1996 में बोर्ड का पुनर्गठन किया गया और औद्योगिक नीति एवं संवर्धन बोर्ड के अंतर्गत लाया गया। पुन: वर्ष 2003 में इसे आर्थिक मामलों के विभाग के दायरे में लाया गया। 

अरुण जेटली ने खत्म किया था एफआईपीबी

साल 2017-18 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में एफआईपीबी को भंग करने का फैसला लिया था। 

इस संदर्भ में जेटली ने कहा था कि एक नया मेकैनिज्म एफआईपीबी की जगह लेगा, जिसके अंतर्गत कैबिनेट द्वारा मंजूर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत संबंधित मंत्रालय द्वारा प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही जेटली ने कहा कि सेंसिटिव सेक्टर्स के लिए गृह मंत्रालय की मंजूरी की जरूरत बनी रहेगी। एफआईपीबी को खत्म करने से भारत में विदेश निवेश की प्रक्रिया को और सुचारू बनाने में मदद मिलेगी।

बोर्ड के कार्य

इस बोर्ड का काम था कि यह जल्द से जल्द विदेशी निवेश के प्रस्तावों को स्वीकृत करे, अन्य एजेंसियों को पारदर्शिता बनाए रखने और विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा देने का भी बोर्ड काम करता था। यह बोर्ड विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, गैर-सरकारी और तमाम अन्य उद्योगों से बात करता था।
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