भारतीय रिजर्व बैंक ने 36,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी सफलतापूर्वक संपंन्न की। आरबीआई ने 5.91 फीसदी पर 2028 में परिपक्व होने वाली प्रतिभूति के लिए 6,000 करोड़ रुपये और 6.33 फीसदी पर 2035 में परिपक्व होने वाली प्रतिभूति के लिए 30,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि तय की थी। दोनों नीलामियां पूरी तरह सब्सक्राइब हो गईं। यह सरकारी बॉन्ड के प्रति निवेशकों की मजबूत मांग को दर्शाता है।
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गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां भी पूरी तरह स्वीकर हुई
आंकड़ों के अनुसार 5.91 प्रतिशत जीएस 2028 के लिए 98 प्रतिभागियों से कुल 24,453 करोड़ रुपये के प्रतिस्पर्धी बोली प्रस्ताव मिले। वहीं, 6.33 प्रतिशत जीएस 2035 के लिए 402 बोलियों के जरिए 74,694 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। मूल्यांकन के बाद, आरबीआई ने 2028 बॉन्ड के लिए 5,998.13 करोड़ रुपये और 2035 बॉन्ड के लिए 29,947.86 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धी बोलियों को स्वीकार किया। गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियां भी पूरी तरह स्वीकार कर ली गईं। इनकी राशि क्रमश: 1.86 करोड़ रुपये और 52.13 करोड़ रुपये थी।
प्रतिस्पर्धी बोलियों में कंपनियां, बैंक और अन्य संस्थाएं निश्चित प्रतिफल पर बोली लगाकर प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं। इसमें आवंटन सबसे कम बोली लगाने वालों को दिया जाता है। हालांकि, गैर-प्रतिस्पर्धी बोलियों में खुदरा निवेशक और छोटे संस्थागत भाग लेते हैं और वे वांछित प्रतिफल नहीं देते हैं।
बॉन्ड को प्राथमिक डीलरों से पूरा अंडरराइटिंग समर्थन मिला
दोनों प्रतिभूतियों की नीलामी को प्राथमिक डीलरों से पूरा अंडरराइटिंग समर्थन मिला। 2028 के बॉन्ड के लिए 6,000 करोड़ रुपये और 2035 के बॉन्ड के लिए 30,000 करोड़ रुपये की पूरी अधिसूचित राशि को अंडरराइट किया गया और स्वीकार भी कर लिया गया। यह संकेत देता है कि निवेशक कम रिटर्न के बावजूद सरकारी बॉन्ड्स में निवेश को तैयार हैं, जो इन प्रतिभूतियों में गहरे भरोसे का संकेत है।
निवेशकों को है आरबीआई की आगामी बैठक का इंतजार
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 5 अगस्त से 7 अगस्त 2025 के बीच आयोजित होने वाली है। बाजार ब्याज दर के रुख या मुद्रास्फीति अनुमानों में किसी भी बदलाव के लिए बैठक के परिणाम पर बारिकी से नजर रखेगा।