आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार को निवेश और खपत बढ़ाने के साथ रोजगार देने पर ध्यान देना होगा। आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में कहा गया है कि सेवा क्षेत्र में तेज सुधार, खपत और निवेश में वृद्धि की संभावनाओं की बदौलत अर्थव्यवस्था में V आकार में सुधार देखने को मिलेगा। इसमें व्यापक टीकाकरण अभियान की भी अहम भूमिका होगी।
शुक्रवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता रही है। यही वजह है कि राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) की शुरुआत की गई, जिसके लिए 2020-25 के दौरान 111 लाख करोड़ खर्च करने का प्रस्ताव है। सड़क एवं राजमार्ग क्षेत्र में भी निवेश 2014-15 के 51,935 करोड़ से बढ़ाकर 2019-20 के दौरान 1,72,767 करोड़ किया गया। सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में महामारी के प्रकोप के बाद बढ़ती गतिशीलता पर ध्यान देने से पता चलता है कि विभिन्न संकेतक जैसे ई-वे बिल, रेल माल भाड़ा, जीएसटी संग्रह और बिजली की मांग बढ़कर न केवल महामारी पूर्व स्तरों पर पहुंच गई हैं बल्कि पिछले साल के स्तरों को भी पार कर गई हैं।
इसके अलावा, अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका है और सरकार रोजगार बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। यही कारण है कि जनवरी-मार्च, 2019 के मुकाबले 2020 की समान अवधि में नियमित वेतन वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। बेरोजगारी दर भी 2017-18 के 6.1 फीसदी से घटकर 2018-19 में 5.8 फीसदी रह गई। 20 दिसंबर, 2020 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 2019-20 के दौरान कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से 78.58 नए उपभोक्ता जुड़े हैं। 2018-19 में यह संख्या 61.1 लाख थी। सितंबर, 2020 में ईपीएफओ से 14.2 लाख उपभोक्ता जुड़े, जो सर्वाधिक है।
बुनियादी आर्थिक तत्व अब भी मजबूत
सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश के बुनियादी आर्थिक तत्व अब भी मजबूत हैं। लॉकडाउन में ढील के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के जरिए दी जा रही जरूरी मदद के बल पर अर्थव्यवस्था बड़ी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। हालांकि, सेवा, विनिर्माण और निर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए थे, जिनमें अब सुधार दिख रहा है।
आपूर्ति बेहतर करने से मिलेगी महंगाई से राहत
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि महंगाई की सही तस्वीर दिखाने के लिए खाद्य उत्पादों के ‘भरांश’ में संशोधन होना चाहिए। 2020-21 के दौरान खुदरा और थोक महंगाई एक-दूसरे से उलट दिशा में चली हैं। मुख्य खुदरा महंगाई में पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है, जबकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई नीचे आई है। महामारी के कारण आपूर्ति पक्ष की दिक्कतों से खुदरा महंगाई अप्रैल, 2020 से लगातार बढ़ रही है। अप्रैल-दिसंबर (2020-21) बढ़कर 9.1 फीसदी पर पहुंच गई। आर्थिक सर्वेक्षण में वस्तुओं की आपूर्ति पर लगी पाबंदियों में ढील देने पर जोर दिया गया है, जिससे दिसंबर, 2020 में महंगाई के मोर्चे पर थोड़ी राहत जरूर मिली। दिसंबर में यह 5 फीसदी के नीचे पहुंचकर 4.59 फीसदी रही, जबकि थोक महंगाई चार महीने के निचले स्तर 1.22 फीसदी पर पहुंच गई।
वित्तीय घाटा: संशोधित अनुमानों से ज्यादा
2019-20 के अस्थायी आंकड़ों के लिए वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.6 फीसदी है। यह 2019-20 के संशोधित अनुमानों से 0.8 फीसदी और 2018-19 में वित्तीय घाटे से 1.2 फीसदी अधिक है। 2018-19 की तुलना में 2019-20 के अस्थायी आंकड़ों में प्रभावी राजस्व घाटा जीडीपी का 1 फीसदी से बढ़कर 2.4 फीसदी हो गया।
नवोन्मेष: तीसरे स्थान पर पहुंचने का रास्ता
सर्वेक्षण में कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि दर को तेज करने के नवोन्मेष पर जोर देना होगा। इसके लिए अनुसंधान और विकास पर कुल खर्च वर्तमान में जीडीपी के 0.7 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी तक ले जाना होगा। भारत अभी दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अगर इसे तीसरे स्थान पर पहुंचना है तो नमोन्मेष पर ध्यान देना होगा और इसमें व्यावसायिक क्षेत्र का योगदान बढ़ाकर 50 फीसदी से ज्यादा करना होगा। भारत 2020 में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में पहली बार शीर्ष-50 में शामिल हुआ, जो 2015 में 81वें स्थान पर था।
हेल्थकेयर: सरकारी खर्च बढ़ाने की जरूरत
स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च बढ़ाकर जीडीपी का 2.5 से 3 फीसदी तक ले जाने की बात कही गई है। 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में भी यह लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद अभी यह एक फीसदी के आसपास ही है। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे के साथ टेलीमेडिसिन में भी खर्च बढ़ाने की जरूरत है।
स्टार्टअप: 4.7 लाख लोगों को रोजगार
महामारी के बाद स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से उबरा है। बीते साल यूनिकॉर्न की सूची में रिकॉर्ड 12 स्टार्टअप ने जगह बनाई, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई। 23 दिसंबर, 2020 तक 41,061 स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है। देश में 39,000 से अधिक स्टार्टअप्स के जरिए 4.7 लाख लोगों को रोजगार मिला है। एक दिसंबर, 2020 तक भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) ने सेबी के पास पंजीकृत 60 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एएफआई) को 4,326.95 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स के जरिए जारी किया जाए, जिसमें कुल 10,000 करोड़ रुपये हैं।
ई-शिक्षा: खत्म होगा डिजिटल भेदभाव
महामारी के दौरान ऑनलाइन स्कूली शिक्षा व्यापक रूप से बढ़ी है। अगर ई-शिक्षा का उचित उपयोग किया गया तो शहरी-ग्रामीण, स्त्री-पुरुष, उम्र एवं विभिन्न आय समूहों के बीच डिजिटल भेदभाव और शैक्षिक अंतर समाप्त होगा। कोविड-19 के दौरान सरकार ने बच्चों की शिक्षा तक पहुंच बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें ‘पीएमईविद्या’ जैसे प्रयास शामिल हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मोड के जरिए छात्रों और शिक्षकों की शिक्षा तक पहुंच को सक्षम बनाना है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बीते 2 साल में स्कूली छात्रों के स्मार्टफोन प्रयोग में 25.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2018 में सरकारी और निजी स्कूलों के 36.5 फीसदी छात्र स्मार्टफोन का प्रयोग करते थे। 2020 में यह संख्या 61.8 फीसदी हो गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 818.17 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
पीडीएस: बिक्री मूल्य बढ़ाने की जरूरत
खाद्य सब्सिडी के खर्च को असहनीय रूप से अधिक बताते हुए सुझाव दिया गया है कि 80 करोड़ लाभार्थियों को राशन की दुकानों से दिए जाने वाले अनाज का बिक्री मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए से खाद्यान्नों को सस्ती दर पर दिया जाता है। इसके तहत राशन की दुकानों से तीन रुपये प्रति किलो चावल, दो रुपये प्रति किलो गेहूं और एक रुपये प्रति किलो की दर से मोटा अनाज का वितरण होता है। सर्वेक्षण में कहा गया है, खाद्य सुरक्षा के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को देखते हुए खाद्य प्रबंधन की आर्थिक लागत को कम करना मुश्किल है, लेकिन बढ़ते खाद्य सब्सिडी बिल को कम करने के लिए केंद्रीय निर्गम मूल्य (सीआईपी) में संशोधन पर विचार करना चाहिए। 2020 के बजट में पीडीएस और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए खाद्य सब्सिडी के लिए 1,15,569.68 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।
पर्यटन क्षेत्र: उबारने के लिए संजीवनी जरूरी
पर्यटन क्षेत्र पर महामारी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यात्रा पर प्रतिबंध, उपभोक्ताओं में डर से पिछले साल क्षेत्र की वृद्धि नकारात्मक स्थिति में पहुंच गई। हालांकि, कोरोना के मामलों में कमी आने और टीकाकरण अभियान से क्षेत्र में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। इसके बावजूद पर्यटन क्षेत्र को महामारी के प्रकोप से उबारने के लिए विशेष उपाय करने होंगे। ई-पर्यटन वीजा के जरिए 2019 में देश में 29.28 लाख पर्यटक आए थे, जबकि 2015 में यह आंकड़ा 4.45 लाख था।
सॉवरेन रेटिंग: पारदर्शी बने कार्यप्रणाली
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी नहीं देती हैं। इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को (बीबीबी-/बीएएए3) रेटिंग मिली हो। भारत की वित्तीय नीति का फंडामेंटल मजबूत है। सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, जिसमें अर्थव्यवस्था के मूल तत्वों का प्रतिबिंब हो।