सार्वजनिक क्षेत्र के केनरा बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूरोप के सबसे बैंड एचएसबीसी के जीवन बीमा क्षेत्र के संयुक्त उपक्रम केनरा एचएसबीसी ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स लाइफ इंश्योरेंस ने इस साल क्युमुलेटिव ब्रेक इवन हासिल कर ली है। अगले साल से वह निवेशकों को लाभांश देने लगेगी। कंपनी के कामकाज पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने कंपनी के एमडी-सीईओ अनुज माथुर से बातचीत की। पेश है अंश:
-अनुज माथुर, एमडी एवं सीईओ, केनरा एचएसबीसी ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स लाइफ इंश्योरेंस
वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी ने संपूर्ण घाटे को पाट दिया है। इसका मतलब है कि क्युमुलेटिव ब्रेक इवन प्राप्त कर लिया है। इस साल 165 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ हुआ है।
प्रश्न- आप कैसे आश्वस्त हैं कि कंपनी अगले साल भी लाभ अर्जित करेगी।
उत्तर- हम इसलिए आश्वस्त हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था में भरोसा दिख रहा है। अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर छह से सात फीसदी सालाना है। इसका मतलब बीमा उद्योग में इसका गुणक प्रभाव काम करेगा। देखिए, कंपनी के जो प्रवर्तक हैं, उनमें से तीनों वित्तीय कारोबार से जुड़े हैं। दो तो बड़े बैंक हैं, जो हमारी पॉलिसी के वितरक हैं। इस समय केनरा बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स की शाखाओं की संख्या 10 हजार के करीब है। इनके कुल ग्राहकों की संख्या 11.5 करोड़ के करीब हैं। इनमें से अभी तक हम महज एक फीसदी ग्राहकों का ही बीमा कर पाए हैं। हमारे ग्राहकों की आमदनी जब बढ़ेगी तो जाहिर है कि वे बीमा पॉलिसी भी खरीदेंगे। आगामी वर्षों में बेहतर संभावना इसलिए दिखती है, क्योंकि हमारे 99 फीसदी ग्राहकों ने अभी तक बीमा ही नहीं लिया है।
प्रश्न- कंपनी 2018-19 के दौरान क्युमुलेटिव ब्रेक इवन पर आ गई है। इसका मतलब ऑरपरेशनल परफॉर्मेंस से है या फाइनेंशियल परफॉर्मेंस से?
उत्तर- क्युमुलेटिव ब्रेक इवन का मतलब बताने से पहले मैं आपको कंपनी के इतिहाल में ले जाना चाहूंगा। इसकी स्थापना 2008 में हुई थी, जिसके बाद से कुछ साल तक नुकसान हुआ। कंपनी ने पहली बार आपने घाटे को पाटते हुए वित्त वर्ष 2012-13 में मुनाफा कमाया। उसके बाद फिर स्थिति खराब हुई और कंपनी को नुकसान हुआ। उस दौरान पूरे जीवन बीमा उद्योग के नुकसान हुआ। फिर कंपनी की स्थिति ठीक हुई और लाभ होने शुरू हुआ। लेकिन तब तक जो नुकसान हो गया था, उसे पाटने में ही पांच साल लग गए। इस दौरान भी कंपनी ने मुनाफा कमाया, लेकिन उसकी प्रोविजनिंग पुराने नुकसान को भरने में करने की वजह से लाभ नहीं दिखा सकते थे। देश का कानून कहता है कि जब तक आप पुराने घाटे को पाट नहीं लेते, लाभांश की घोषणा नहीं कर सकते हैं। वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी ने संपूर्ण घाटे को पाट दिया है। इसका मतलब है कि क्युमुलेटिव ब्रेक इवन प्राप्त कर लिया है। इसलिए यह हमारे लिए मील का पत्थर है। अगले साल से हम लाभांश भी घोषित करेंगे। इस साल 165 करोड़ रुपये का शुद्घ लाभ अर्जित हुआ है।
प्रश्न- किसी भी बीमा कंपनी का विकास उसके नए प्रीमियम पर निर्भर करता है। आपके यहां इसकी क्या स्थिति है?
उत्तर- 2017-18 के दौरान कंपनी का नया बीमा कारोबार 1,228 करोड़ रुपये रहा था, जो 2018-19 में बढ़कर 1,460 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह 19 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है। इससे पहले देखें तो पिछले तीन वर्र्षों से कंपनी का वैयक्तिक नया प्रीमियम कारोबार (तकनीकी तौर पर वेटेड प्रीमियम इनकम) 27 फीसदी के चक्रवृद्घि वार्षिक दर से बढ़ रहा है। इस दौरान जीवन बीमा उद्योग की विकास दर 16 फीसदी रही है। हमने उद्योग से 10 फीसदी से भी ज्यादा विकास दर हासिल किया है, इसलिए मानकर चल रहे हैं आगे भी कंपनी की विकास दर ऐसी ही रहेगी। यही नहीं, कंपनी का लक्ष्य कुछ ही वर्षों में इस क्षेत्र की शीर्ष-5 कंपनियों में शुमार होना है।
प्रश्न- इस क्षेत्र में 24 कंपनियां काम कर रही हैं। आपकी कंपनी शीर्ष-5 में कैसे पहुंचेगी, जबकि शुरुआत ही काफी देर से हुई है?
उत्तर- ऐसा 100 फीसदी संभव है। यह सही है कि इस क्षेत्र की अधिकतर कंपनियों ने वर्ष 2001 में ही शुरुआत कर ली थी, जबकि हमारी शुरुआत 2008 में हुई है। लेकिन उनके कारोबार का 11वां साल देखेंगे और हमारे कारोबार का 11वां साल देखेंगे तो इसमें काफी अंतर है। हम अपने ग्राहकों को जो सेवाएं दे रहे हैं, उसकी गुणवत्ता और अन्य कंपनियों की गुणवत्ता में काफी अंतर है। कंपनी के ग्राहक सेवा में निरंतर सुधार हो रहा है। हमारा क्लेम सेटलमेंट अनुपात 98 फीसदी है, जो बीमा उद्योग में काफी अच्छा माना जाता है।
प्रश्न- प्रधानमंत्री जीवन ज्याति बीमा योजना में भी कंपनी ने हिस्सेदारी की है। इनमें से कितने लाभार्थी आपके साथ जुड़े हैं?
उत्तर- हमारे यहां प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 26 लाख लाभार्थी जुड़े हैं। इन्होंने भी इस बीमा सुविधा का लाभ लिया है और उनका रिटेंशन काफी अच्छा है। आप देखिए कि 330 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर कंपनी दो लाख रुपये की जीवन बीमा दे रही है। यह प्रतिदिन एक रुपये से भी कम का प्रीमियम है। इतने में और किसी योजना के तहत बीमा मिल ही नहीं सकता।
प्रश्न- क्या सभी लाभार्थियों का बीमा ऑटो डेबिट मोड में है?
उत्तर- इस बीमा योजना में वार्षिक बीमा प्रीमियम महज 330 रुपये है। इसमें घर-घर जा कर रिन्यूअल प्रीमियम वसूलना कॉस्ट इफेक्टिव नहीं होगा। इसलिए सबको ऑटो डेबिट मोड में डाले हुए हैं। यदि संबंधित लाभार्थी के खाते में नवीनीकरण की तारीख तक उतने रुपये हो तो उनकी बीमा पालिसी के नवीकरण के लिए पैसे अपने आप कट जाएंगे और उनकी पालिसी रिन्यू हो जाएगी।