मौजूदा समय में भारत की अर्थव्यवस्था आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रही है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF ) ने भारत को चेतावनी दी है। आईएमएफ ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए भारत को जल्द से जल्द बड़े कदम उठाने की जरूरत है। इस संदर्भ में आईएमएफ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था, ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था में से एक है, इसलिए भारत को तेजी से कदम उठाने होंगे।
मामले में आईएमएफ की एशिया और प्रशांत की हेड रानिल सालगाडो ने कहा है कि लाखों भारतीयों को गरीबी से बाहर लाने के बाद अब भारत आर्थिक सुस्ती के बीच है। सुस्ती को दूर करने के लिए और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत को जल्द से जल्द नीतिगत उपायों की आवश्यकता है।
आईएमएफ ने अक्तूबर में भारत की 2019 की आर्थिक वृद्धि की दर को 6.1 फीसदी और 2020 में इसके सात फीसदी तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया था।
आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने मुंबई में आयोजित इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में कहा था कि संस्थान ने इससे पहले अक्तूबर में अनुमान जारी किया था और जनवरी 2020 में इसकी समीक्षा करेगा। उन्होंने कहा, भारत में उपभोक्ता मांग और निजी क्षेत्र के निवेश में आई कमी तथा कमजोर पड़ता निर्यात कारोबार जीडीपी वृद्धि में आई सुस्ती के लिये जिम्मेदार बताये जा रहे हैं।
अपनी वार्षिक रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा कि भारत के लिए परिदृश्य नीचे की ओर जाने का है। सालगाडो ने कहा कि सुस्ती की वजह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के ऋण में कमी है। इसके अतिरिक्त व्यापक रूप से ऋण को लेकर परिस्थितियां सख्त हुई हैं।
इससे पहले जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में सुस्ती गहराने के संकेत मिले हैं। जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 फीसदी रह गई, जो लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है। यह लगातार छठी तिमाही है जब जीडीपी में सुस्ती दर्ज की गई है।
इससे पहले जनवरी-मार्च, 2013 तिमाही में जीडीपी विकास दर 4.3 फीसदी रही थी, वहीं एक साल पहले की समान अवधि यानी जुलाई-सितंबर, 2018 तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी।