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Rupee All-Time Low: रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया, इकोनॉमी से आपकी जेब तक होंगे इसके कई बड़े असर

Sun, 01 Dec 2024 09:52 PM IST
द बोनस द बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rupee Hits Fresh Low Level: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार गिरता जा रहा है। इस सप्ताह के दौरान रुपये ने अपने इतिहास का नया सबसे निचला स्तर छू दिया।
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रुपया बनाम डॉलर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय रुपये की गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले कुछ समय से डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू लगातार कम हुई है। नवंबर महीना खास तौर पर रुपये के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। महीने के आखिरी सप्ताह के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये ने नए रिकॉड निचले स्तर को छू दिया।
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क्लियरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया गिरकर 1 डॉलर के मुकाबले 84।49 के स्तर पर खुला। एक दिन पहले रुपया 84।47 के स्तर पर रहा था। कारोबार के दौरान रुपया गिरकर 84।5150 के स्तर तक आ गया। अंत में सप्ताह के अंतिम दिन रुपया लगभग स्थिर बंद हुआ। लेकिन उससे पहले सप्ताह के दौरान रुपये ने नया रिकॉर्ड निचला स्तर छू दिया। गुरुवार को रुपया कारोबार के दौरान 84।53 तक के स्तर तक गिर गया था। इस सप्ताह के दौरान रुपया कई बार 84।50 के स्तर से नीचे गिरा।

नवंबर में इतना कमजोर हो गया रुपया
सप्ताह के दौरान गुरुवार के कारोबार में रुपये ने 84।53 के जिस स्तर को छुआ, वहां तक रुपया इससे पहले कभी नहीं गिरा था। रुपया अपने जीवन में पहली बार पिछले महीने 84 के स्तर को पार किया था। अब उसने 84।50 के स्तर को भी पार कर लिया है। पूरे नवंबर महीने में रुपया 0।50 फीसदी गिरा है, जो मार्च 2024 के बाद किसी एक महीने के दौरान रुपये में आई अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।
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डोनाल्ड ट्रंप की वापसी बनी बड़ा फैक्टर
रुपये में आ रही इस गिरावट के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत को एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप वापसी करने में कामयाब हुए हैं। 20 जनवरी से उनका नया कार्यकाल शुरू होने वाला है। नवंबर की शुरुआत में उनकी जीत के बाद अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हुआ है, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी पर पड़ रहा है। इस कारण रुपया भी प्रभावित हो रहा है।

कमजोर रुपये के ये नुकसान गिना रहे हैं अर्थशास्त्री
बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के इकोनॉमिस्ट डॉ सुधांशु कुमार बताते हैं कि रुपये में गिरावट के व्यापक असर होने वाले हैं। सबसे पहला असर तो रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार पर दिख रहा है। रुपये को संभालने में रिजर्व बैंक को अपने भंडार से डॉलर खर्च करना पड़ रहा है। कमजोर रुपया भारत के लिए इम्पोर्ट बिल बढ़ा सकता है, जिसका असर व्यापार घाटे पर दिखेगा। इम्पोर्ट महंगा होने से आयात होकर आने वाले सामान महंगे हो जाएंगे। यानी महंगाई के बढ़ने का खतरा है। बाहर पढ़ने गए भारतीयों और विदेश घूमने जाने वालों को अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। इसका एक और बड़ा नुकसान ईंधन के मोर्चे पर हो सकता है। भारत को सस्ते कच्चे तेल से जो फायदा हो रहा था, कमजोर रुपये के कारण वह कम हो सकता है।

क्या कहते हैं रिजर्व बैक के आंकड़े?
रिजर्व बैंक के आंकड़े भी डॉ सुधांशु की बात की पुष्टि कर रहे हैं। 22 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 1।31 बिलियन डॉलर कम होकर 656।582 बिलियन डॉलर पर आ गया। उससे पहले 15 नवंबर को समाप्त हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 17।76 बिलियन डॉलर गिर गया था, जो किसी एक सप्ताह के दौरान भंडार में आई सबसे तेज गिरावटों में से है। विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार 8 सप्ताह से गिरावट आ रही है। भंडार 27 सितंबर वाले सप्ताह में 704।885 बिलियन डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 22 नवंबर वाले सप्ताह में फॉरेन करेंसी एसेट में 3।043 बिलियन डॉलर की गिरावट आई और वह 566।791 बिलियन डॉलर रह गया। दूसरी ओर रिजर्व बैंक का कहना है कि उसके भंडार में सोना इस दौरान बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, रिजर्व बैंक के पास स्वर्ण भंडार 22 नवंबर वाले सप्ताह में 1।828 बिलियन डॉलर बढ़कर 67।573 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया।
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