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इंफ्रा परियोजनाओं की लागत में 3.40 लाख करोड़ का इजाफा: 1,775 प्रोजेक्ट पर बढ़ा बोझ, आम लोगों पर क्या असर?

Wed, 26 Aug 2026 06:46 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

देश की 1,775 बड़ी इंफ्रा परियोजनाओं की लागत 3.40 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई है। इससे सरकार के खर्च और बजट पर दबाव बढ़ रहा है। सड़क, रेलवे और बिजली जैसी सुविधाओं से जुड़ी इन परियोजनाओं में देरी का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है, क्या बढ़ती लागत चिंता बढ़ाएगी?
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इंफ्रा परियोजनाओं के पिछड़ने का संकट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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देश में सड़क, रेलवे, ऊर्जा और दूसरी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर सरकार भले ही तेजी से खर्च कर रही हो, लेकिन इन परियोजनाओं की बढ़ती लागत अब चिंता का कारण बन रही है।
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केंद्र की निगरानी में चल रही 1,775 बड़ी इंफ्रा परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 3.4 लाख करोड़ बढ़कर 37.10 लाख करोड़ रुपये हो गई है। शुरुआती अनुमानित लागत 33.70 लाख करोड़ रुपये थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की जुलाई रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी लागत 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक है और इनकी निगरानी 17 केंद्रीय मंत्रालयों या विभागों के स्तर पर की जा रहा है। सरकार के कुल प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ट्रांसपोर्ट सेक्टर की है। इसमें 1,246 परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत करीब 19.81 लाख करोड़ रुपये है। 

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आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब
इंफ्रा प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने का असर सिर्फ सरकारी बजट तक सीमित नहीं रहता। सड़क, रेलवे, बिजली, पानी और शहरी परिवहन में लागत बढ़ने का मतलब है कि सरकार को उसी काम को पूरा करने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इससे बजट पर दबाव बढ़ सकता है। देरी होने पर आम लोगों को सड़क, रेल, परिवहन या अन्य सुविधाओं का लाभ मिलने में भी ज्यादा समय लग सकता है।
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