भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shakti Kant Das) ने कहा है कि अक्तूबर महीने में महंगाई की दर सात फीसदी से नीचे रह सकती है। उन्होंने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार दोनों महंगाई की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपट रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत के समग्र मैक्रोइकॉनॉमिक फंडामेंटल लचीले बने हुए हैं। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जहां तक जहां तक दो से छह प्रतिशत के बीच मुद्रास्फीति को रखने के लक्ष्य का सवाल है इसे बदलने की आवश्यकता नहीं है। भले ही इसे बदलने की चर्चा चल रही हो, पर ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था वाला देश बना रहेगा भारत : शक्तिकांत
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार को विश्वास जताया कि मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता के कारण भारत 7 फीसदी की संभावित विकास दर के साथ सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
मुंबई में एक समिट में दास ने इस बात पर जोर दिया कि बैंकिंग और गैर-बैंकिंग क्षेत्रों द्वारा समर्थित देश की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। पूरी दुनिया ने कई झटके झेले हैं। मैं इसे तीन झटकों के रूप में देखता हूं। पहला कोरोना महामारी, फिर यूक्रेन में युद्ध और अब वित्तीय बाजार में उथल-पुथल है।
वित्तीय बाजार में उथल-पुथल मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों के नेतृत्व में दुनिया भर में एक समान मौद्रिक नीति को मजबूत करने से उत्पन्न हो रही है। दास ने कहा, इस तरह की लगातार उथल-पुथल के साथ यूरोपीय यूनियन मंदी की स्थिति का सामना कर रहा है। लेकिन संभावनाएं हैं कि वह इससे बच जाएगा। अमेरिका की अर्थव्यवस्था स्थिर है, लेकिन अन्य देश ऐसे हैं जहां विकास धीमा हो गया है।
2-6% के महंगाई लक्ष्य को बदलने की जरूरत नहीं
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भले ही केंद्रीय बैंक पिछले नौ माह से महंगाई को छह फीसदी से कम करने में विफल रहा हो, लेकिन इसके बावजूद 2-6 फीसदी के महंगाई लक्ष्य को बदलने की जरूरत नहीं है। सरकार और केंद्रीय बैंक इसे कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। आरबीआई के एक आंतरिक शोध का हवाला देते हुए दास ने कहा, भारत के लिए छह फीसदी से ऊपर महंगाई विकास के लिए हानिकारक होगी।