आसमान छूती महंगाई से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रेपो दर में इजाफा, गेहूं और अन्य खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही तक महंगाई की मार पड़ती रहेगी। इस दौरान न सिर्फ पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे बलि्क पहले से ज्यादा ईएमआई भरनी होगी। हालांकि, महंगाई से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार और आरबीआई ने कई कदम उठाए हैं।
गेहूं : वैश्विक बाजार में बढ़ रहे दाम
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी का कहना है कि भारत के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने और रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन में उत्पादन से वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें बढ़ गई हैं। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का मूल्य सूचकांक मई, 2022 में औसतन 157.4 अंक रहा, जो पिछले साल मई से 22.8% अधिक है। वैश्विक कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बाजार में भी दिखेगा। इससे न सिर्फ आटा महंगा होगा बल्कि इससे बनने वाले उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे।
केनरा व करूर वैश्य बैंक ने भी दिया झटका
केनरा बैंक और करूर वैश्य बैंक ने कर्ज महंगा कर दिया है। केनरा बैंक ने एक साल की अवधि के लिए कोष की सीमांत लागत आधारित कर्ज की दर (एमसीएलआर) को 0.05 फीसदी बढ़ाकर 7.40 फीसदी कर दिया है। छह महीने की अवधि के लिए एमसीएलआर को 7.30 फीसदी से बढ़ाकर 7.35 फीसदी किया गया है। नई दरें 7 जून से प्रभावी हैं।