कोरोना वायरस से बचने की दवा या वैक्सीन लोगों को कब तक मिल पायेगी, इस बारे में दावे के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता। यही कारण है कि इस हालात में भी लोग आगे बढ़ने की राह तलाश रहे हैं।
मांग में बदलाव के साथ-साथ बाजार में बदलाव आता है। यह कोरोना के साथ भी हुआ है। कोरोना के कारण होटल, पर्यटन को भारी नुकसान हुआ है, तो पीपीई किट्स, सैनिटाइजर, मास्क और अन्य अनेक चीजों के निर्माण के अवसर भी खुले हैं।
सामान्यत: ऐसी स्थितियों में एक बाजार दूसरी जगह शिफ्ट होता है। यह इस समय भी हो रहा है।
सीमेंट मेन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन महेंद्र सिंह कहते हैं कि कोरोना काल में औद्योगिक संगठनों के मैनेजमेंट को अपनी सोच में बड़ा बदलाव करना होगा।
आर्थिक हितों के ऊपर श्रमिकों के शारीरिक स्वास्थ्य और उनकी अन्य सुविधाओं को ध्यान देना पड़ेगा। अगर उद्योग ऐसा करने में सफल रहेंगे तो इस बदलाव के बाद भी वे चलते रहेंगे, अन्यथा लंबे समय में उन्हें नुक्सान उठाना पड़ेगा।
लॉकडाउन के दौरान निर्माण गतिविधियों के ठप पड़ जाने के कारण सीमेंट और स्टील उद्योग की कार्य क्षमता बहुत प्रभावित हुई थी, लेकिन अब तकरीबन 50-60 फीसदी क्षमता के साथ इनमें दोबारा कामकाज शुरू हो चुका है।
जिन आद्योगिक स्थलों पर कामगरों की सुविधाओं का ख्याल रखा गया है वे आज भी काम कर रहे हैं, जबकि जहां पर श्रमिकों को कोरोना काल में असुरक्षा महसूस हुई, वहां श्रमिकों की कमी हो गई है।