चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने रविवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात की और अमेरिका के वैश्विक व्यापार युद्ध तथा आर्थिक वैश्वीकरण के समक्ष चुनौतियों के दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। ली दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इंडोनेशिया की तीन दिवसीय यात्रा पर शनिवार दोपहर को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे। यह इस साल उनकी पहली विदेश यात्रा का पहला पड़ाव था।
इंडोनेशिया और चीन 20 प्रमुख विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं व ब्रिक्स के सदस्य देश हैं। ली रविवार शाम को इंडोनेशिया-चीन व्यापार स्वागत समारोह में अपने संबोधन के लिए 60 प्रमुख चीनी व्यवसायियों को अपने साथ लाए। उन्होंने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती बाहरी चुनौतियों के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था ने इस साल तेजी से विकास हासिल किया है।
ली ने इस कार्यक्रम में कहा, "वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय स्थिति गतिरोध की स्थिति में है, एकतरफावाद और संरक्षणवाद बढ़ रहा है, धमकाने वाला व्यवहार बढ़ रहा है।" इस कार्यक्रम में सुबियांटो भी मौजूद थे।
ली ने कहा कि इस वर्ष गुटनिरपेक्ष आंदोलन की 70वीं वर्षगांठ है, जिसे एशियाई और अफ्रीकी देशों द्वारा इंडोनेशिया के बांडुंग शहर में आयोजित किया गया था, जब सात दशक से अधिक समय पहले विश्व एक ऐतिहासिक चौराहे पर था। ली ने कहा कि एकजुटता, मैत्री और सहयोग की बांडुंग भावना ने वैश्विक दक्षिण देशों की एकता और सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ली ने कहा, "सात दशक से भी अधिक समय बाद, दुनिया एक बार फिर महत्वपूर्ण चौराहे पर है।" उन्होंने सभी देशों से बातचीत और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के माध्यम से मतभेदों को सुलझाते हुए साझा आधार तलाशने का आह्वान किया।
मलेशिया ने कहा- अमेरिकी टैरिफ से निपटने के लिए एकजुट रहना चाहिए
मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन ने रविवार को कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में तेजी लानी चाहिए। उन्हें अपने बाजारों में विविधता लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से टैरिफ वृद्धि के कारण वैश्विक व्यापार में उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए हमें एकजुट होना चाहिए।
मोहम्मद ने दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करते हुए म्यांमार में जारी घातक गृहयुद्ध में शामिल पक्षों से शत्रुता समाप्त करने का भी आह्वान किया। 2021 में सेना की आरे से सरकार पर अधिपत्य जमाने बाद से वहां हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।