विज्ञान और मेडिकल चिकित्सा की उन्नति का नायाब उदाहरण है 'इन विट्रो फर्टिलाइजेशन' यानी आईवीएफ तकनीक। 1978 में इनफर्टिलिटी की दिशा में डॉक्टरों को बड़ी सफलता मिली। उस साल पहला टेस्ट ट्यूब बेबी पैदा होने के बाद अब तक दुनिया में इस तकनीक से 80 लाख से ज्यादा बच्चे पैदा हो चुके हैं।
1978 में पहला टेस्ट ट्यूब (आईवीएफ) बेबी लुईस ब्राउन के पैदा होने के एक दशक बाद ही आपने इस क्षेत्र में कदम रख लिया था। क्या वजह थी?
देश में इनफर्टिलिटी क्षेत्र सालाना 20 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। आप इसके मौजूदा बाजार को कैसे देखते हैं?
इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि इनफर्टिलिटी बड़ी समस्या बन गई है। इससे निपटने के लिए बड़े पैमाने पर प्रभावी उपायों की दरकार है। अभी देश में 2.5 लाख चक्र हो रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर 5 लाख हो जाएंगे। इंदिरा आईवीएफ इसमें बड़ी भूमिका निभाएगा। हमने अब तक एक लाख से ज्यादा सफल गर्भधारण कराए हैं। हम ऐसा करने वाले देश के पहले संस्थान हैं।
हमारे विशेषज्ञ सालाना 30,000 आईवीएफ चक्रों को अंजाम दे रहे हैं। बाजार के हिसाब से हमारी वृद्धि भी बीते तीन साल में 20 फीसदी के आसपास रही है। आगे भी इसे कायम रख पाएंगे क्योंकि हमारी बहुत भारी पूंजीगत जरूरतें नहीं हैं और न ही कोई कर्ज है। इसके चलते हम आसान और तेज विस्तार करते हुए इस क्षेत्र में अग्रणी बने रहेंगे।
बढ़ती इनफर्टिलिटी के कारण क्या है?
बदलती जीवनशैली, खराब खानपान और देरी से विवाह जैसे कुछ बड़े कारणों ने इनफर्टिलिटी को बढ़ाया है। आज युवक-युवतियां शादी से पहले करियर को तवज्जो देते हैं, जिसके चलते शारीरिक क्षमताएं दांव पर लगी रहती हैं। ज्यादा उम्र में अंडाणु-शुक्राणु की संख्या और क्षमता कम हो जाती है। यह स्थिति इनफर्टिलिटी को जन्म देती है।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह देश में विकराल रूप लेकर महामारी का रूप ले सकती है। इसका सबसे बड़ा बचाव यही है कि जीवनशैली व खानपान में सुधार लाया जाए। अंडे व शुक्राणु फ्रीज कराने का भी उपाय है, ताकि जब जरूरत पड़े, तब संतान उत्पत्ति की जा सके।
इंदिरा आईवीएफ की आगे देश-विदेश में विस्तार की क्या योजना है?
हम एक लाख सफल आईवीएफ चक्र पूरे कर चुके हैं और जल्द इसे दो लाख कर देंगे। हम दुनियाभर के लोगों तक भौगोलिक पहुंच बढ़ा रहे हैं। हर साल 20 से 30 अस्पताल खोलने की योजना है। साथ ही, सफलता दर में इजाफा करते हुए मरीजों को संतुष्ट करना सबसे बड़ा लक्ष्य है। भारत के बाहर हम जल्द ही दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी देशों में अपने केंद्र स्थापित करने जा रहे हैं। साथ ही अगले साल शेयर बाजार में कंपनी का आईपीओ लाने की भी तैयारी है।
चुनौती की बात करें, तो...
तेजी से बढ़ते आईवीएफ क्षेत्र के सामने डॉक्टरों की कम संख्या बड़ी बाधा है। इसके लिए हम लगातार प्रशिक्षण देने में जुटे हैं। 2017 से इंदिरा फर्टिलिटी एकेडमी के तहत मलयेशिया, फिलीपीन, नेपाल, बांग्लादेश, जिम्बाब्वे और अन्य अफ्रीकी देशों के छात्र पढ़ रहे हैं। हमारी कोशिश है कि देश में पर्याप्त पेशेवर तैयार मुहैया कराए जाएं।