कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी, लॉकडाउन में ढील और कारोबारी गतिविधियों के पटरी पर आने से दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर) से खपत में सुधार आएगा। इसका सकारात्मक असर उपाय भारतीय उपभोक्ताओं के खर्च करने पर दिख सकता है।
फिच सॉल्यूशंस ने मंगलवार को कहा कि उपभोक्ताओं का खर्च 2021 में 9.1% की दर से बढ़ेगा, जिसमें पिछले साल 9.3% गिरावट रही थी। इस दौरान भारतीय उपभोक्ता 73.3 लाख करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं ।
रिसर्च फर्म ने उपभोक्ता आउटलुक-2021 रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल की बड़ी गिरावट के बाद घरेलू खर्च में सुधार दिखेगा। इस दौरान घरेलू खर्च में 9.1 फीसदी की वास्तविक वृद्धि के साथ भारतीय उपभोक्ताओं का दृष्टिकोण सकारात्मक रहने की उम्मीद है। हालांकि, कुल घरेलू खर्च कोविड-19 के पूर्व स्तर (2019) से कम रहेगा। 2019 में उपभोक्ताओं ने 74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए थे।
महंगाई का बना रहेगा दबाव
आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों के पटरी पर लौटने से इस साल परिवारों की खर्च करने योग्य आय कोरोना पूर्व स्तर से बढ़कर 4.16 लाख करोड़ पहुंच जाएगी। 2019 में यह 4.09 लाख करोड़ थी। हालांकि, खर्च पर महंगाई का दबाव बना रहेगा। इस साल महंगाई औसतन 5 फीसदी रहने का अनुमान है।
करों के बोझ से उपभोक्ता पर असर
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कहा कि करों का बोझ और खासतौर पर उत्पादों पर लगने वाला अप्रत्यक्ष कर परिवारों को अधिक खर्च करने से रोक रहा है। ईंधन पर उच्च उत्पाद शुल्क और कॉरपोरेट कर की दरों में कमी से परिवारों पर कर का कुल बोझ बढ़कर 75 फीसदी पहुंच गया है, जो 2019-20 में 60 % था। महंगाई से परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
कम वेतन से खर्च में आ सकती है बाधा
2021 में औसतन बेरोजगारी दर कुल श्रमबल की 8% रहेगी , जिसके 2023 में ही कोरोना पूर्व स्तर से नीचे आने का अनुमान है। सुधार के बाद लोग काम पर लौट तो रहे हैं, लेकिन कोविड-19 पूर्व स्तर से कम घंटे काम कर रहे हैं या कम वेतन वाली नौकरियां कर रहे हैं। इससे लोगों के खर्च योग्य आय में कमी आएगी।