त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले भारतीय उपभोक्ता नई वित्तीय आशावाद और भरोसे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। डेलॉय इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट कंज्यूमर सिग्नल्स: इंडिया चैप्टर के अनुसार, भारत में उपभोक्ता भावना वैश्विक औसत से कहीं अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई के दबाव में कमी और हालिया जीएसटी सुधारों से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में सुधार आया है। इससे बाजार में उत्सव का माहौल और बढ़ा है।
रिपोर्ट में एक प्रमुख प्रवृत्ति खाद्य मितव्ययिता सूचकांक (एफएफआई) में भारी गिरावट है, जो अब तीन वर्षों में अपने दूसरे सबसे निचले स्तर पर है। यह संयम से मूल्य-आधारित खर्च की ओर बदलाव को दर्शाता है, जहां उपभोक्ता कटौती करने के बजाय अनुकूलन कर रहे हैं।
वाहन खरीद इरादा (वीपीआई) साल-दर-साल 6.6 अंक बढ़ा, जो बड़ी खरीदारी में बढ़ते विश्वास का संकेत है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में भी तेजी आई है, और अब 60 प्रतिशत उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों पर विचार कर रहे हैं, जबकि दो साल पहले यह आंकड़ा 47 प्रतिशत था।
विवेकाधीन खर्च खासतौर से यात्रा, मनोरंजन और व्यक्तिगत देखभाल पर लगातार बढ़ रहा है। इसे मुद्रास्फीति में कमी और हाल ही में हुए जीएसटी सुधारों से बल मिला है, जिससे सभी क्षेत्रों में सामर्थ्य में सुधार हुआ है। अनुमानित मासिक उपभोक्ता खर्च जुलाई में दो प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में चार प्रतिशत हो गया।
डेलॉय साउथ एशिया के पार्टनर और कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर आनंद रमणाथन ने कहा कि आज के भारतीय उपभोक्ता पहले से कहीं अधिक समझदार, डिजिटल रूप से सशक्त और वित्तीय रूप से आत्मविश्वासी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हम केवल उपभोक्ता भावना में वापसी नहीं देख रहे, बल्कि प्राथमिकताओं के पुनर्संतुलन का दौर देख रहे हैं। उपभोक्ता अब मूल्य को खींचना सीख रहे हैं, अपनी आकांक्षाओं से समझौता नहीं कर रहे।
डेलॉय की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन भारत में बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता में सालाना आधार पर पांच प्रतिशत अंक की कमी आई है। अब केवल 70 प्रतिशत उपभोक्ता ही इसे अपनी प्रमुख चिंता मानते हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यात्रा और आतिथ्य क्षेत्र में खर्च स्थिर बना हुआ है। उपभोक्ता अब उच्च गुणवत्ता वाले अनुभवों को प्राथमिकता दे रहे हैं और आराम व अतिरिक्त सेवाओं पर अधिक खर्च करने के लिए तैयार हैं।
डेलॉय के मुताबिक, भारतीय उपभोक्ताओं के व्यवहार में एक निर्णायक बदलाव देखने को मिल रहा है -रक्षात्मक खर्च से विचारशील खर्च की ओर। यह बदलाव एक अधिक परिपक्व, मूल्य-सचेत और आत्मविश्वासी उपभोक्ता वर्ग को दर्शाता है, जो वैश्विक खपत रुझानों के लिए एक नया मॉडल स्थापित कर रहा है।