पिछले वर्षों की चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय रिटेल उद्योग 2026 में मजबूत आधार और बेहतर मार्जिन के साथ प्रवेश करने को तैयार है। मांग का रुख अब बड़े महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर बढ़ रहा है। करीब 1.1 ट्रिलियन डॉलर के आकार के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिटेल बाजार बना हुआ है।
डेलॉयट इंडिया के कंज्यूमर इंडस्ट्री लीडर आनंद रामनाथन के मुताबिक, 2026 के लिए रिटेल सेक्टर का आउटलुक बेहद आशावादी है। उन्होंने कहा कि जीडीपी ग्रोथ 6.4 से 6.7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, महंगाई काबू में है और उपभोक्ता भावना मजबूत बनी हुई है। ई-कॉमर्स की पहुंच छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक और गहरी होगी, जबकि क्विक कॉमर्स और सोशल कॉमर्स पारंपरिक मॉडल को चुनौती देते रहेंगे।
एक्सेंचर के आदित्य प्रियदर्शन ने कहा कि 2025 में भारत का रिटेल इकोसिस्टम ज्यादा औपचारिक और डिजिटल हुआ। उनके अनुसार, यह वर्ष 'भारत की उछाल' से परिभाषित हुआ, जिसमें टियर 2 और टियर 3 शहरों ने विकास में भाग नहीं लिया बल्कि उन्होंने इसका नेतृत्व किया।
रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के सीईओ कुमार राजगोपालन का कहना है कि 2026 में रिटेल सेक्टर संतुलित लेकिन व्यापक ग्रोथ के साथ आगे बढ़ेगा। उपभोक्ता खर्च चयनात्मक रहेगा, लेकिन त्योहारों और विशेष अवसरों पर खपत मजबूत बनी रहेगी।
वी-मार्ट के एमडी ललित अग्रवाल के मुताबिक, 2025 में प्रीमियम और ब्रांडेड रिटेल के लिए साल चुनौतीपूर्ण रहा, जबकि वैल्यू रिटेल ने बेहतर प्रदर्शन किया। 2026 में कपड़ा, फैशन और अन्य सेगमेंट्स में खपत बढ़ने से ग्रोथ को सहारा मिलने की उम्मीद है।
ईवाई इंडिया के पारेश पारेख का मानना है कि उद्योग अब प्राइसिंग-ड्रिवन ग्रोथ से निकलकर वॉल्यूम-ड्रिवन रिकवरी के शुरुआती दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां एआई आधारित निर्णय-प्रणालियां अहम भूमिका निभाएंगी।
कुल मिलाकर, विशेषज्ञों की राय में 2026 भारतीय रिटेल सेक्टर के लिए तकनीक, उपभोक्ता-केंद्रित रणनीतियों और ऑपरेशनल दक्षता का साल होगा, जिसमें छोटे शहरों की बढ़ती भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।