निजी क्षेत्र के अधिकतर काम एलसी के मार्फत होते हैं। यह इतना भरोसेमंद साधन है कि आयात-निर्यात तक के लिए अग्रिम राशि भेजने के बजाए एलसी दिया जाता है। इस प्रणाली में रेलवे चाहे तो वाणिज्यिक बैंक से एक महीना, छह महीने, साल भर या इससे भी ज्यादा अवधि केलिए एलसी जारी करा सकता है।
आमतौर पर निजी कंपनियों के लिए एलसी जारी करने के लिए बैंक एक तयशुदा शुल्क तो लेते ही हैं, बल्कि कुछ राशि भी जमा कराते हैं। लेकिन सरकार का काम होने की वजह से रेलवे को यह सुविधा फ्री में भी मिल सकती है।
वित्त मंत्रालय से मिल चुकी है हरी झंडी
रेलवे ने नकदी हस्तांतरण के बदले एलसी जारी करने के फार्मूले पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय को भी विश्वास में लिया है। इस पर वित्त मंत्रालय की हरी झंडी है, इसलिए इस पर किसी राज्य को कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद बीते अगस्त में ही इस बारे में रेलवे ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को सूचित कर दिया था।
यात्री सुविधाओं को मिलेगी तवज्जो
अधिकारी के अनुसार जब भूमि अधिग्रहण मद में हजारों करोड़ रुपये की राशि रेलवे को कुछ समय के लिए मिलेगी, तो यात्री सुविधाओं से संबंधित परियोजनाओं को पैसे की तंगी का सामना नहीं करना होगा। ऐसी परियोजनाएं महज कुछ करोड़ रुपये के कारण कई सालों तक चलती रहती हैं। अब यह शीघ्र पूरी हो सकेंगी।