भारतीय कंपनियां इस साल बड़े सौदे करने की तैयारी में हैं। सज्जन जिंदल की जेएसडब्ल्यू पेंट्स ने डच पेंट निर्माता अक्जो नोबेल इंडिया के अधिग्रहण के लिए 12,915 करोड़ का सौदा किया है। यह इस साल का तीसरा बड़ा सौदा है। इससे वह देश में पेंट उद्योग में चौथी बड़ी कंपनी बन जाएगी। जेएसडब्ल्यू अक्जो नोबेल इंडिया में 8,986 करोड़ रुपये में 74.76 प्रतिशत और खुले बाजार से 3,929.06 करोड़ रुपये में 25 प्रतिशत हिस्सा खरीदेगी।
इस सौदे से पहले जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन ने मई में 13,483 करोड़ रुपये में यस बैंक में 20 फीसदी हिस्सा खरीदने की घोषणा की थी।
एसबीआई सात अन्य बैंकों के साथ मिलकर यस बैंक में 20% हिस्सा सुमितोमो मित्सुई को बेचेगा। सुमितोमो-यस बैंक सौदा भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़ा सीमापार निवेश था। इस वर्ष सबसे बड़ा सौदा बजाज समूह का है। बजाज समूह ने बजाज आलियांज लाइफ व जनरल बीमा में आलियांज की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी को 24,180 करोड़ में मार्च में खरीदने की घोषणा की थी। ओएनजीसी-एनटीपीसी ग्रीन की अयाना रिन्यूएबल पावर को 19,500 करोड़ मूल्य पर खरीदने की योजना है।
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एनएसई पर सभी की नजर
निवेशकों की नजर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ पर है। यह भारतीय आईपीओ की जननी है। हाल में सेबी चेयरमैन तुहिनकांत पांडे ने कहा था, एनएसई के आईपीओ में सेबी की ओर से अब कोई बाधा नहीं है। सूत्रों ने बताया, एनएसई ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले में 1,388 करोड़ में सेबी को सेटलमेंट का ऑफर दिया है।
एनएसई का मूल्य 6 लाख करोड़ आंका गया है। इस आधार पर अगर यह 10 फीसदी भी हिस्सा बेचता है तो आईपीओ रिकॉर्ड 60,000 करोड़ का हो सकता है। संस्थागत और हाई नेटवर्थ के साथ खुदरा निवेशकों मेंे शेयर की जबरदस्त मांग है। मई में इसका शेयर गैर सूचीबद्ध बाजार में 1,500 रुपये पर था जो अब 2,500 रुपये पर आ गया है।
कोलंबो डॉकयार्ड में 444.52 करोड़ की हिस्सेदारी हासिल करेगी मझगांव डॉक
सार्वजनिक क्षेत्र की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) श्रीलंका की कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी में 52.96 मिलियन डॉलर (444.52 करोड़ रुपये) के सौदे के तहत हिस्सेदारी हासिल करेगी। यह कदम श्रीलंका में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने और एमडीएल को क्षेत्रीय समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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एमडीएल का यह पहला अंतरराष्ट्रीय उद्यम है। यह इसे एक घरेलू जहाज निर्माता से वैश्विक समुद्री उद्यमी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। एमडीएल की ओर से एक बयान में कहा गया है कि कोलंबो बंदरगाह में स्थित कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी (सीडीपीएलसी) हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है।
अधिकारियों के अनुसार, सीडीपीएलसी में नियंत्रण हिस्सेदारी हासिल करने से क्षेत्र में भारत का जहाज निर्माण और मरम्मत का परिदृश्य काफी हद तक बदल जाएगा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मरम्मत, रिफिटिंग और नए जहाज निर्माण के निर्माण में नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि कोलंबो डॉकयार्ड श्रीलंका का सबसे बड़ा जहाज निर्माण यार्ड है। यह कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और श्रीलंका के समुद्री उद्योग का प्रमुख केंद्र है। यह एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में वाणिज्यिक और सरकारी ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है।