आईईए ने कहा कि भारत की मौजूदा तेल रिजर्व क्षमता किसी आपात स्थिति के लिए पर्याप्त नहीं है। अभी भारत के पास महज 10 दिन के आयात जितना तेल आरक्षित है। बिरोल ने कहा कि भारत विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक में तेल भंडारण के लिए प्लांट बना रहा है। यह अच्छी कोशिश है, लेकिन पर्याप्त नहीं है। मेरी सलाह है कि भारत को अपना तेल रिजर्व भंडार निरंतर बढ़ाते रहना चाहिए। आईईए के अधिकतर सदस्य देशों के पास करीब 90 दिन का आयात तेल रिजर्व रहता है।
क्रूड के दाम बढ़ने के आसार नहीं
ईरान संकट को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के सवाल पर बिरोल ने कहा कि इस समय दुनियाभर के तेल बाजार में पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। लिहाजा ईरान संकट का तेल कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता है कि अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन कम होगा। यह बढ़ता ही रहेगा। साथ ही ब्राजील, नॉर्वे, कनाडा जैसे देशों में भी उत्पादन बढ़ रहा है, जिससे पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी और क्रूड के दाम में बड़ा उछाल नहीं आएगा।
आईईए के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भारत में ऊर्जा से जुड़े चार मंत्रालयों का विलय किए जाने की जरूरत है। इसके अलग-अलग होने से नियमों-विनियमों की ओवरलैपिंग हो जाती है और परियोजनाओं को धरातल पर आने में बेवजह देरी का सामना करना पड़ता है। उल्लेखनीय है कि भारत में ऊर्जा क्षेत्र के लिए बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय काम कर रहे हैं।