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SBI: 20% अमेरिकी टैरिफ से भारत की जीडीपी को 50 आधार अंकों का हो सकता है नुकसान, एसबीआई की रिपोर्ट में दावा

Tue, 18 Feb 2025 01:07 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SBI: भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि अमेरिका भारत पर 20 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ लगाता है तो इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को 50 आधार अंकों (बीपीसी) का नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट में आगे क्या कहा गया है, आइए जानें।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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अमेरिका की ओर से अपने व्यापारिक साझेदारों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान किया गया है। इससे भारत की चिंता भी बढ़ गई है। अमेरिका का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अमेरिकी वस्तुओ पर अमेरिका की तुलना में अधिक टैरिफ वसूलता है। इसलिए अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर भी पारस्परिक टैरिफ लगाने की आशंका बढ़ गई है। बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका भारतीय उत्पादों पर कितना टैरिफ लगाने का एलान करता है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ के असर के बारे में बताया है।

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भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि अमेरिका भारत पर 20 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ लगाता है तो इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को 50 आधार अंकों (बीपीसी) का नुकसान हो सकता है।  हालांकि, रिपोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसा होने की संभावना बहुत कम है। एसबीआई ने कहा है, "भारतीय निर्यात पर 20 प्रतिशत फ्लैट टैरिफ के नकली प्रभाव से सकल घरेलू उत्पाद में 50 बीपीएस का नुकसान होगा"। इस टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभाव कृषि, शिकार, वन क्षेत्र और मछली पालन जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबार पर पड़ेगा। इन क्षेत्रों को अनुमानित रूप से 1,543.4 मिलियन अमरीकी डॉलर का नुकसान झेलना पड़ सकता है। 

वित्तीय क्षेत्र की बात करें तो इस क्षेत्र में अमेरिकी टैरिफ के परिणामस्वरूप 1,426.9 मिलियन अमरीकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके बाद, रसायन और रासायनिक उत्पादों में से जुड़े क्षेत्र को 1,106.5 मिलियन अमरीकी डॉलर और कपड़ा उत्पादों से जुड़े क्षेत्र को 1,076.0 मिलियन अमेरीकी डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित अन्य क्षेत्रों में मूल धातु और गढ़ी हुई धातुएं (804.7 मिलियन अमरीकी डॉलर का संभावित नुकसान) और खनन और उत्खनन (512.4 मिलियन अमरीकी डॉलर का संभावित नुकसान) शामिल हैं।
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रिपोर्ट बताती है कि इस तरह के टैरिफ का भारत के निर्यात-संचालित क्षेत्रों पर खासा असर पडे़गा। यही कारण है कि भारत और अमेरिका ने टैरिफ विवादों को सुलझाने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए कई दौर की व्यापार चर्चाओं में भाग लिया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ दर 2018 में 2.72 प्रतिशत से बढ़कर 2021 में 3.91 प्रतिशत हो गई।  2022 में इसमें थोड़ी कमी आई और घटकर 3.83 प्रतिशत हो जाएगी। अमेरिकी आयात पर भारत का टैरिफ 2018 में 11.59 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 15.30 प्रतिशत हो गया है। 

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