भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल भी दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ती रहेगी। हालांकि, वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, कुछ सुस्ती के संकेतों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि के मजबूत स्थिति बने रहने की उम्मीद है। इसके विपरीत, वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2025 में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दुनियाभर के मुख्य अर्थशास्त्रियों का आकलन
दुनियाभर के मुख्य अर्थशास्त्रियों के आकलन के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि के लिहाज से दक्षिण एशिया लगातार आगे बना हुआ है। 61 फीसदी मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दक्षिण एशियाई जीडीपी इस साल मजबूत या बहुत मजबूत बनी रहेगी। इस क्षेत्र में यह प्रदर्शन काफी हद तक भारत में मजबूत वृद्धि का नतीजा है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
साथ ही राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में घटकर करीब दो साल के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई। यह आरबीआई के अनुमान से भी कम है।
धीमी होती जाएगी चीन की अर्थव्यवस्था
विश्व आर्थिक मंच ने कहा, उपभोक्ता मांग में कमी और कमजोर उत्पादकता के बीच चीन के लिए दृष्टिकोण बेहतर नहीं है। आने वाले वर्षों में चीन की वृद्धि दर धीरे-धीरे धीमी होती जाएगी।
- यूरोप के लिए परिदृश्य निराशाजनक बना हुआ है। 74% अर्थशास्त्रियों ने इस साल कमजोर या बहुत कमजोर वृद्धि की आशंका जताई है।
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था में इस साल मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। रोजगार और महंगाई के हालिया आंकड़े भी इस बात का समर्थन करते हैं।
फिक्की ने वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 6.4 फीसदी किया
उद्योग मंडल फिक्की ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि दर अनुमान को 7 फीसदी से घटाकर 6.4 फीसदी कर दिया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) का ताजा अनुमान 2023-24 में दर्ज वृद्धि दर की तुलना में काफी कम है। बीते वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 8.2 फीसदी रही थी। फिक्की ने कहा, अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक असर पड़ेगा।
17 फीसदी अर्थशास्त्रियों को ही सुधार की उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, 56 फीसदी मुख्य अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति कमजोर रहने की आशंका जताई है। सिर्फ 17 फीसदी अर्थशास्त्रियों को ही सुधार की उम्मीद है, जो प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती अनिश्चितता और दुनियाभर में जरूरत के मुताबिक नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता को बताता है।
वैश्विक व्यापार बढ़ने की उम्मीद : 48 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने इस साल वैश्विक कारोबार में मात्रा के लिहाज से वृद्धि का अनुमान लगाया है। यह वैश्विक व्यापार में मजबूती को बताता है। हालांकि, अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने प्रमुख देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका जताई है। इसकी प्रमुख वजह संरक्षणवाद को प्राथमिकता देना है।