आने वाले दशकों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने की राह पर है। मॉर्गन स्टैनली की हालिया रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में ऋण-से-जीडीपी अनुपात में वृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र की जीडीपी में बढ़ती हिस्सेदारी के चलते वैश्विक अर्थव्यस्था में देश की भूमिका उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी। ऋण-से-जीडीपी अनुपात इस बात का सूचक है कि किसी देश पर कितना ऋण बकाया है और वह अपने ऋणों का भुगतान करने के लिए कितना उत्पादन करता है।
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भारत सबसे अधिक मांग वाला उपभोक्ता बाजार बनने की राह पर
रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत बुनियादी कारकों के संयोजन के चलते आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने को तैयार है। इन कारकों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, सक्रिय लोकतंत्र, स्थिर मैक्रोइकोनॉमिक नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा, बढ़ता उद्यमी वर्ग और बेहतर सामाजिक परिणाम शामिल हैं। इसमें कहा गया कि भारत विश्व का सबसे अधिक मांग वाला उपभोक्ता बाजार बन जाएगा। इसमें ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन होगा, सकल घरेलू उत्पाद में ऋण एवं विनिर्माण क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है।
- रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद में तेल की घटती हिस्सेदारी और निर्यात, खासतौर से सेवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी से राजकोषीय समेकन को समर्थन मिलेगा।
- उच्च वृद्धि , कम अस्थिरता और गिरती ब्याज दरों का यह संयोजन इक्विटी बाजार में उच्च मूल्य से आय (पी/ई) अनुपात को समर्थन देता है।
- बेहतर व्यापक आर्थिक स्थिरता और घरेलू बैलेंस शीट में बदलाव शेयर बाजार में निरंतर मांग को बढ़ावा दे रहे हैं।
मॉर्गन स्टेनली को भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा
2000 में आंकड़े जारी होने के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की स्थिति अपने सबसे कमजोर स्तर पर है। इसके बावजूद, मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि उसे भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा है।
जोखिमों को लेकर दी गई चेतावनी
हालांकि, रिपोर्ट में वैश्विक विकास में मंदी, बिगड़ती भू-राजनीति, तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में निरंतर व्यवधान, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी सामग्री और उर्वरकों जैसे क्षेत्रों में, जैसे नकारात्मक जोखिमों के बारे में भी चेतावनी दी गई है।