केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया ट्रेड डील (व्यापार समझौता) भारतीय किसानों, छोटे उद्योग (एमएसएमई), उद्यमियों और कुशल कामगारों के लिए बहुत बड़े मौके खोलेगा। इससे मेक इन इंडिया अभियान को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाला पारस्परिक टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है। यह जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद दी।
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'नई और आधुनिक तकनीक मिलने में मदद मिलेगी'
पीयूष गोयल ने कहा कि इस डील से भारत को अमेरिका से नई और आधुनिक तकनीक मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब भारत के किसान और उद्योग दुनिया के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग, दुनिया के लिए भारत में डिजाइन ओर दुनिया के लिए भारत में इनोवेशन कर पाएंगे। उन्होंने इसे दो समान सोच वाले लोकतांत्रिक देशों की साझेदारी बताया, जो मिलकर शांति, विकास और समृद्ध भविष्य की दिशा में काम करेंगे।
'मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए खुशखबरी- सीतारमण
वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- 'मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए खुशखबरी। अब उन पर 18% का कम टैरिफ लगेगा। इस विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के नेतृत्व को धन्यवाद। हमारे दोनों बड़े लोकतंत्रों के लोगों को इससे लाभ होगा।'
यह ऐतिहासिक समझौता- राजेश अग्रवाल
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे भारत और अमेरिका, दोनों देशों को नवाचार, विकास और साझा समृद्धि मिलेगी। यह डील इसलिए भी अहम है क्योंकि टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, फुटवियर और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर अमेरिका में भारी टैक्स (करीब 50%) के कारण मुश्किल में थे। अब इन सेक्टरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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कब से लागू होगी डील?
हालांकि, थिंक टैंक जीटीआरआई ने कहा है कि अभी यह साफ होना जरूरी है कि किन-किन प्रोडक्ट्स पर यह छूट मिलेगी और यह डील कब से पूरी तरह लागू होगी। वहीं फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (एफआईईओ) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हान ने कहा कि यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। खासकर एशियाई देशों के मुकाबले भारत की स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि कई विदेशी खरीदारों ने जो ऑर्डर रोके हुए थे, वे अब तुरंत वापस आ सकते हैं, खासकर परिधान, कपड़ा, चमड़ा और जूते जैसे सेक्टर में। आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादा टैरिफ के कारण दिसंबर 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात घटकर 6.88 अरब डॉलर रह गया था। हालांकि नवंबर में इसमें अच्छी बढ़त देखी गई थी। नए समझौते से आने वाले महीनों में निर्यात फिर तेज़ होने की उम्मीद है।