रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने देश में आने वाली नई सरकार पर पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में आएं या नहीं, भारत अपनी आर्थिक नीतियों को बरकरार रख सकता है। राजन ने ब्लूमबर्ग टीवी के डेविड इंगल्स के साथ मंगलवार को एक साक्षात्कार में कहा, "भारतीय नीति में बहुत निरंतरता अंतर्निहित है। जो भी सरकार आती है, वह बहुत सारी अच्छी चीजें लेगी जो पिछली सरकार में की गई हैं और उसे जारी रखेंगी।"
शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस विश्वविद्यालय में वित्त विभाग के प्रोफेसर राजन हांगकांग में आयोजित यूबीएस एशियाई निवेश सम्मेलन से इतर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नई सरकार सत्ता में आने के तुरंत बाद एक बजट की घोषणा करेगी, जो संभवतः उन सभी अच्छी चीजों पर ध्यान केंद्रित करेगी जो अब तक किया गया है। नई सरकार यह भी देखने की कोशिश करेगी कि क्या बदलाव किए जाने हैं।
भारत में छह सप्ताह तक चले लोकसभा चुनाव 1 जून को समाप्त हो रहे हैं, इसके परिणाम 4 जून को आएंगे। मोदी सरकार की सत्ता में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि इस बारे में अनिश्चितता है कि पीएम मोदी के दावों के अनुरुप एनडीए सरकार अपने बहुमत का विस्तार कर सकेगी या नहीं। जानकारों के मुताबिक अगर भाजपा अपना समर्थन खो देती है तो आर्थिक सुधारों से दूर जाने की आशंका से चिंतित वित्तीय बाजारों में बिकवाली की आशंका है।
राजन ने कहा कि मोदी सरकार के तहत बुनियादी ढांचे पर खर्च देश में भारी कमियों को देखते हुए जरूरी था। हालांकि, अब इससे आगे बढ़ते हुए भारत को अपने बुनियादी ढांचे (कैपेक्स) की गुणवत्ता पर ध्यान देने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि निवेश केवल प्रमुख औद्योगिक घरानों को ही लाभ न पहुंचाए। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि भारत 2024 और 2026 के बीच नए बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 44.4 लाख करोड़ रुपये ($534 बिलियन) खर्च करेगा, जो 2030 तक आर्थिक विकास को 9% तक बढ़ाने में मदद करेगा।