फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RBI Report: वित्तीय वर्ष 2026 में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत, आरबीआई की रिपोर्ट

Thu, 29 May 2025 11:31 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI Report: वित्तीय वर्ष 2026 में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत, आरबीआई की रिपोर्ट
विज्ञापन
आरबीआई - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत वित्त वर्ष 2026 में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था को खपत में वृद्धि, बैंकों, कॉरपोरेट्स की स्वस्थ बैलेंस शीट से मदद मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है।

विज्ञापन


भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को कहा कि देश वित्त वर्ष 2026 में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि मुद्रास्फीति के अनुकूल दिशा में जाने और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में "धीमी गति" को देखते हुए मौद्रिक नीति को आगे चलकर विकास के लिए सहायक बनाया जाना चाहिए।

आरबीआई ने नवीनतम रिपोर्ट में कहा, "...भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी ढांचे, मजबूत वित्तीय क्षेत्र और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का लाभ उठाकर 2025-26 में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।"
विज्ञापन


केंद्रीय बैंक ने अपनी रिपोर्ट में वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता, भू-राजनीतिक तनाव, दुनियाभर के देशों के बीच व्यापार में कमी, आपूर्ति-शृंखला में व्यवधान और जलवायु से जुड़ी अनिश्चितताओं को विकास के लिए जोखिम बताया है। 

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कहा कि आपूर्ति-शृंखला पर दबाव में कमी, वैश्विक कमोडिटी कीमतों में नरमी और सामान्य से बेहतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण कृषि उत्पादन में वृद्धि जैसे कारक मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण से अच्छे संकेत साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टैरिफ नीतियों में बदलाव के परिणामस्वरूप वित्तीय बाजारों में अस्थिरता की छिटपुट घटनाएं हो सकती हैं, और निर्यात को "अंतर्मुखी नीतियों और टैरिफ युद्धों" के कारण प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

आरबीआई ने कहा कि भारत की ओर से जिन व्यापार समझौतों की कोशिश की जा रही है वह यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि प्रभाव सीमित रहे। साथ ही, सेवा निर्यात और आवक प्रेषण से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि नए वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा "उल्लेखनीय रूप से प्रबंधनीय" हो।

आरबीआई, जिसने लगातार दो समीक्षाओं में प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती की है, ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि अब 12 महीने की अवधि में मुख्य मुद्रास्फीति के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के साथ स्थायी संरेखण पर "अधिक विश्वास" है। ब्याज दर जोखिम की गतिशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, बैंकों को ट्रेडिंग और बैंकिंग दोनों प्रकार के जोखिमों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, विशेष रूप से शुद्ध ब्याज मार्जिन में कमी के मद्देनजर, यह सिफारिश की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें