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GTRI: 'भारत को FTA के तहत EU से चिकित्सा उपकरणों पर करनी चाहिए विशेष छूट की मांग', वैश्विक थिंक टैंक का सुझाव

Sun, 16 Mar 2025 04:28 PM IST
निर्मल कांत बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

GTRI: 'थिंक टैंक जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि भारत को प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय संघ से चिकित्सा उपकरणों पर कुछ विशेष छूट की मांग करनी चाहिए, ताकि निर्यात को बढ़ावा मिल सके। भारत को तब ही टैरिफ कम करना चाहिए, जब यूरोपीय संघ अपने गैर-जरूरी अवरोध हटाए। 
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भारत और यूरोपीय संघ। (प्रतीकात्मक तस्वीर)) - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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भारत को प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत यूरोपीय संघ (ईयू) से चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में कुछ विशेष छूट की मांग करनी चाहिए। इससे भारत अपने निर्यात को बढ़ावा दे सकेगा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने रविवार को यह सुझाव दिया। 

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भारत अधिकांश चिकित्सा उपकरणों पर 0 से 10 फीसदी तक टैरिफ लगाता है। अगर भारत बिना यूरोपीय संघ के नियामक चुनौतियों को हल किए चिकित्सा उपकरणों पर टैरिफ कम करता है, तो इससे यूरोपीय संघ से आयात बढ़ सकता है, लेकिन निर्यात कम हो सकता है। जीटीआरआई ने कहा, एक समान और निष्पक्ष व्यापार सौदा करने के लिए भारत को बदले में कुछ छूट की मांग करनी चाहिए। भारत को चिकित्सा उपकरणों पर टैरिफ तभी कम करना चाहिए, जब यूरोपीय संघ अपने गैरजरूरी टैरिफ के अवरोधों को हटाए। 

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चिकित्सा उपकरणों के लिए भारत-यूरोपीय संघ वार्ता असमान है। यूरोपीय संघ जहां चिकित्सा उपकरणों पर भारत से शून्य टैरिफ की मांग करता है, वहीं दूसरी तरफ वह उच्च नियामक अवरोध बनाए रखता है, जो भारत के निर्यात को यूरोपीय संघ के बाजारों के लिए कठिन बना देता है। 

चिकित्सा उपकरणों के लिए भारत-ईयू एफटीए वार्ता असमान है। जहां एक तरफ यूरोपीय संघ भारत से चिकित्सा उपकरणों पर शून्य शुल्क की मांग करता है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय उत्पादों को अपने बाजार में बेचने में मुश्किलें पैदा करता है। इससे भारत को यूरोपीय संघ के बाजार में अपने निर्यात को बढ़ाने में दिक्कत होती है। 
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जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यूरोपीय संघ के सीमा शुल्क की दरें शून्य हैं, लेकिन इसके बावजूद बाजार में प्रवेश की लागत बहुत अधिक है, क्योंकि वहां के नियामक ढांचे में कड़ी शर्तें हैं। उन्होंने कहा, यूरोपी संघ में निर्यात करना अब और कठिन हो गया है, क्योंकि उसने मेडिसिन डिवाइस डिरेक्टिव्स (ईयू-एमडीडी) को बदलकर मेडिकल डिवाइस रूल्स (ईयू-एमडीआर) लागू किया है। ये नियम ज्यादा सख्त हैं। 

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