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Insurance: स्वास्थ्य बीमा को लेकर युवा उदासीन, 55% पॉलिसीधारक तीन साल में ही बीमा पॉलिसी कर देते हैं रद्द

Wed, 22 Apr 2026 08:01 PM IST
Rahul Kumar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला,मुंबई

सार

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 24–34 आयु वर्ग के युवाओं में स्वास्थ्य बीमा को लेकर स्पष्ट उदासीनता दिखती है। शुरुआत में आधे से अधिक युवा पॉलिसी खरीदते हैं, लेकिन पहले तीन वर्षों में ही प्रीमियम भुगतान बंद कर देते हैं, जिससे पॉलिसी लैप्स हो जाती है। 
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स्वास्थ्य बीमा - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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देश में युवाओं में स्वास्थ्य बीमा को लेकर उदासीनता देखने को मिली है, भारत में 24 से 34 आयु वर्ग के आधे से अधिक युवा स्वास्थ्य बीमा खरीदते हैं, लेकिन पहले तीन साल के भीतर ही बीमा प्रीमियम भरना छोड़ देते हैं और पॉलिसी लैप्स हो जाती है। निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पॉलिसीधारकों में से 55 प्रतिशत पॉलिसीधारक बीमा खरीदने के तीन साल के भीतर ही पॉलिसी रद्द कर देते हैं। इससे यह पता चलता है कि शुरुआत में पॉलिसी खरीद लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसमें बने नहीं रह पाते हैं। यह उच्च पॉलिसी रद्द होने की दर यह दिखाती हैं, कि युवाओं द्वारा लिया जाने वाला निर्णय अक्सर जोखिम सुरक्षा और स्थायी समझ के बजाए अल्पकालिक कारणों की वजह से होता है।

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आंकड़ें पर नजर 
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है, वित्त वर्ष 2025 में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम 9.12 प्रतिशत से बढ़कर 1.17 लाख  करोड़ रुपये हो गया, हालांकि बीमाकृत लोगों की संख्या में केवल 1.36 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह संख्या 58 करोड़ तक पहुंच गई। इसमें अधिक चौकाने वाली बात यह रही कि,  उनमें से अधिकतर एक बीमा कंपनी से दूसरी बीमा कंपनी में नहीं जा रहे हैं, बल्कि इस कैटेरगी को पूरी तरह से छोड़ रहे हैं।

स्वास्थ्य बीमा छोड़ने का मुख्य कारण भुगतान करने में असमर्थ
रिपोर्ट कहती है, समय पर प्रीमियम का भुगतान नहीं करना इसका सबसे बड़ा कारण है। भुगतान बंद करने वालों में 46 प्रतिशत लोग इसे ही कारण बताते हैं। इसके अलावा अन्य वित्तिय दायित्वों के कारण युवाओं पर दबाव पड़ता है और भुगतान बंद हो जाता है। भुगतान बंद करने वालों में से 66 प्रतिशत के पआस अभी भी लोन की दबाव है, जिनमें से 33 प्रतिशत के पास पसर्नल लोन और 17 प्रतिशत के पास होम लाने का कर्ज है।
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पॉलिसी का दावा नहीं किया, फिर भी प्रीमियम चुका रहे है : रिपोर्ट कहती है, असल में पॉलिसीधारक हर साल 20,000 से लेकर 25,000 रुपये का भुगतान प्रीमियम के रूप में करते है, लेकिन पॉलिसी उन्होंने पॉलिसी का दावा नहीं किया है। यानी उन्होंने इसका उपयोग नहीं किया है, इसलिए वे इसे जारी रखना उचित नहीं समझते क्योंकि इसका कोई फायदा उनको नहीं मिल रहा है। इसलिए वे पॉलिसी बंद कर देते हैं।

इसमें मूल्य नहीं है : रिपोर्ट बताती है, युवाओं को इसमें को मूल्य नहीं मिल रहा है, यानी कोई फायदा नहीं है। लगभग 34 प्रतिशत ने अपनी पॉलिसी इसलिए बंद कर दी क्योंकि उनका मानना था कि वे और उनका परिवार स्वस्थ हैं और उनको तुंरत किसी सेवा की जरूरत भी नहीं है। इसलिए बीमा को अनावश्यक समझकर बंद कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार युवा जिन चीजों का उपयोग करते हैं उसका भुगतान करने पर वे खुश है। अक्सर स्वास्थ्य बीमा की दो से तीन साल तक आवश्यकता नहीं होती, ऐसे में वह उत्पाद जो वे इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन उसके लिए भुगतान करना पड़ता है, ऐसे में उससे अलगाव पैदा हो जाता है और उसे वह बंद कर देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 31 प्रतिशत बीमा पॉलिसी को बंद करने वाले लोगों का कहना है कि वे ऐसे उत्पादों में निवेश करना पसंद करेंगे जो उन्हें प्रतिफल दें, यानी वे उत्पाद जहां निवेश कर उन्हें फायदा मिले वहां वे निवेश करना पसंद करते हैं।

17 प्रतिशत ऐसे लोग भी हैं , जो उत्पाद से खुश नहीं
रिपोर्ट के अनुसार  वहीं 17 प्रतिशत ऐसे लोग भी हैं , जो उत्पाद से खुश नहीं है। वे सीमित बीमारियों को कवर करने, उत्पाद की जानकारी सही न मिलने की वजह से बीमा छोड़ देते हैं। लेकिन रिपोर्ट में एक दिलचस्प  बात यह भी देखने को मिली है कि, टियर 3 बाजारों में स्वास्थ्य बीमा में रुचि लोगों की बनी हुई है।  
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